सलोनी तिवारी: नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर हाल ही में अमेरिका के अलास्का में हुए पुतिन-ट्रंप सम्मेलन की जानकारी साझा की। इस फोन वार्ता में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
फोन कॉल की मुख्य बातें
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पुतिन ने अलास्का सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई बातचीत और उसके नतीजों का ब्यौरा मोदी को दिया।
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पीएम मोदी ने पुतिन को कॉल के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत की नीति स्पष्ट है—संवाद और कूटनीति के जरिए ही यूक्रेन संकट का समाधान संभव है।
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दोनों नेताओं ने भारत-रूस की विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
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रूस ने अलास्का सम्मेलन की जानकारी भारत के अलावा ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और चीन जैसे देशों के साथ भी साझा की है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहल रूस की अपनी रणनीतिक साझेदारियों को बनाए रखने और मजबूत करने की कोशिश को दर्शाती है।
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भारत ने इस बैठक का स्वागत करते हुए इसे युद्धविराम और शांति बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना है।
भारत का रुख
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मोदी ने हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी बात कर भारत का संदेश दोहराया था कि “यह युद्ध का युग नहीं है।”
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भारत लगातार कह रहा है कि हिंसा से समाधान नहीं निकलता और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संवाद, कूटनीति और शांति प्रयासों की ज़रूरत है।
मोदी ने सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर पुतिन को धन्यवाद कहा:
“Thank my friend, President Putin, for his phone call and for sharing insights on his recent meeting with President Trump in Alaska. India has consistently called for a peaceful resolution of the Ukraine conflict….”
निष्कर्ष
यह फोन कॉल भारत-रूस रिश्तों की गहराई और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को दर्शाता है। भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह वैश्विक शांति और युद्धविराम का समर्थक है और उसकी विदेश नीति संतुलन व संवाद पर आधारित है।

