सलोनी तिवारी: नई दिल्ली/टोक्यो। : जापान, जो अपनी तकनीक और अनुशासन के लिए दुनिया भर में मशहूर है, अब भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन रहा है। जापान छात्र सेवा संगठन (JASSO) के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में जापान में 2,79,274 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे, जो 2022 से लगभग 21% ज्यादा थे। मई 2024 तक यह संख्या बढ़कर 3,36,708 हो गई—यानि एक साल में फिर से 21% की तेज़ वृद्धि।
भारत में MBBS यानी मेडिकल शिक्षा हमेशा से छात्रों के सपनों का हिस्सा रही है, लेकिन यहां सीमित सीटों के कारण प्रतियोगिता बेहद कठिन है। 2025 में NEET-UG परीक्षा में 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए, जबकि उपलब्ध सीटें बेहद कम रहीं। यही वजह है कि कई छात्र अब विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं।
जापान में मेडिकल पढ़ाई की खासियत
जापान में अब भी पारंपरिक 6 साल का MD कोर्स (जो भारत के MBBS के बराबर है) सबसे लोकप्रिय है, लेकिन हाल के वर्षों में अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाए जाने वाले कोर्सों की संख्या बढ़ी है। इन कोर्सों में केवल क्लिनिकल मेडिसिन ही नहीं, बल्कि ग्लोबल हेल्थ, पब्लिक हेल्थ, बायोमेडिकल साइंस जैसे आधुनिक विषय भी शामिल हैं।
बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण जापान में जेरिएट्रिक नर्सिंग, पैलिएटिव केयर, डिजिटल हेल्थ और बायोइनफॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विशेषज्ञों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। Keio University जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ हेल्थकेयर मैनेजमेंट और नर्स प्रैक्टिशनर प्रोग्राम भी चला रही हैं, जो छात्रों को मेडिकल स्किल्स के साथ लीडरशिप ट्रेनिंग भी देते हैं।
भारतीय छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया
जापान में MBBS या MD कोर्स करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए NEET-UG क्वालिफाई करना अनिवार्य है। फरवरी या मार्च 2026 में 12वीं पास करने वाले और जापान में पढ़ाई करने का लक्ष्य रखने वाले छात्रों को पहले NEET UG 2026 पास करना होगा।
भले ही छात्र 2026 में NEET पास कर लें, जापान में प्रवेश की सबसे जल्दी संभव तिथि अप्रैल 2027 होगी, क्योंकि अधिकांश जापानी विश्वविद्यालय नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत इसी समय करते हैं।
क्यों चुनें जापान?
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उच्च शिक्षा का स्तर: जापान की मेडिकल रिसर्च और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी विश्वस्तरीय है।
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सुरक्षा और अनुशासन: छात्रों के लिए एक सुरक्षित और संरचित वातावरण।
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सांस्कृतिक अनुभव: आधुनिकता और परंपरा का अनोखा संगम।
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कैरियर अवसर: जापान में पढ़ाई पूरी करने के बाद वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त डिग्री और बेहतर रोजगार संभावनाएं।
निष्कर्ष:
भारत में मेडिकल शिक्षा की सीमित सीटें और प्रतियोगी माहौल कई छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रहा है। जापान, अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उन्नत मेडिकल सुविधाओं और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कोर्स विकल्पों के साथ, भारतीय छात्रों के लिए एक आशाजनक गंतव्य बनकर उभर रहा है।

