नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत चार नए सेमीकंडक्टर निर्माण यूनिट्स को मंजूरी दे दी गई है। यह कदम भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कहाँ लगेंगे नए प्लांट
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ओडिशा (भुवनेश्वर) — 2 यूनिट्स
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पंजाब (मोहाली) — 1 यूनिट
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आंध्र प्रदेश — 1 यूनिट
इन चारों प्रोजेक्ट्स में कुल ₹4,594 करोड़ का निवेश होगा और देश में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की संख्या अब 10 हो जाएगी। इन सभी परियोजनाओं से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बनेंगे।
ओडिशा की बड़ी भूमिका
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SiCSem Pvt. Ltd. और UK की Clas-SiC Wafer Fab Ltd. मिलकर देश का पहला कॉम्पाउंड सेमीकंडक्टर फेब बनाएंगे। यह रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहनों और उच्च शक्ति उपकरणों के लिए बेहद अहम होगा।
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3D Glass Solutions Inc. यहां ग्लास-बेस्ड एडवांस्ड पैकेजिंग यूनिट बनाएगी, जिAसमेंA हाई-परफॉर्मेंस चिप इंटरकनेक्ट तकनीक का इस्तेमाल होगा।
पंजाब (मोहाली)
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Continental Device India Ltd. (CDIL) अपने मौजूदा उत्पादन को अपग्रेड करेगा और उच्च क्षमता वाले MOSFETs, IGBTs जैसे पावर सेमीकंडक्टर्स बनाएगा।
आंध्र प्रदेश
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Advanced System in Package (ASIP) Technologies दक्षिण कोरिया की APACT Co. Ltd. के साथ मिलकर हाई-एंड पैकेजिंग यूनिट बनाएगी, जिसका उपयोग मोबाइल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स में होगा।
रणनीतिक महत्व
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में 30% इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू एडिशन हासिल करना है, जो चीन को लगभग 30 साल में मिला। यह मंजूरी भारत को तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में मज़बूत स्थिति देगी और विदेशों पर निर्भरता घटाएगी।
भविष्य की संभावनाएँ
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भारत का चिप निर्माण इकोसिस्टम मजबूत होगा।
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रक्षा, डेटा सेंटर और ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स में स्वदेशी उत्पादन बढ़ेगा।
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2,000 से अधिक हाई-स्किल जॉब्स के साथ कई अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होंगे।
Anshika Media का निष्कर्ष:
यह निर्णय भारत की तकनीकी स्वतंत्रता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अमेरिका और चीन के प्रभुत्व वाले सेमीकंडक्टर बाज़ार में भारत अब एक उभरते हुए खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराने को तैयार है।

