मुंबई, 13 अगस्त 2025: पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने उद्योगपति अनिल अंबानी, उनके बेटे जय अनमोल अंबानी और पूर्व यस बैंक सीईओ राणा कपूर द्वारा दायर सेटलमेंट याचिका को खारिज कर दिया है। मामला 2016 से 2019 के बीच रिलायंस म्यूचुअल फंड द्वारा यस बैंक के ₹2,150 करोड़ के एटी-1 बॉन्ड में किए गए निवेश से जुड़ा है, जिसे 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान पूरी तरह राइट-ऑफ कर दिया गया था।
क्यों हुई याचिका खारिज?
SEBI की जांच में सामने आया कि यह निवेश कथित रूप से यस बैंक द्वारा अंबानी समूह की अन्य कंपनियों को दिए गए कर्ज के बदले में किया गया था। नियामक ने पाया कि इस सौदे से निवेशकों को ₹1,828 करोड़ का भारी नुकसान हुआ और इसका “मार्केट-वाइड इम्पैक्ट” भी देखने को मिला।
आगे क्या होगा?
सेटलमेंट याचिका खारिज होने के बाद SEBI अब अनिल अंबानी और उनके बेटे को निवेशकों को मुआवज़ा देने का निर्देश देने की तैयारी में है। साथ ही, भारी जुर्माना और अन्य नियामकीय कार्रवाई की संभावना भी है।
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी भेजा गया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक जांच की संभावना बढ़ गई है।
बड़ा घोटाला और ईडी की जांच
यह मामला यस बैंक से जुड़े कथित ₹3,000 करोड़ के लोन फ्रॉड का हिस्सा है। हाल ही में ईडी ने अंबानी समूह से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की थी। आरोपों में फर्जी बैंक गारंटी, धनशोधन और कर्ज का दुरुपयोग शामिल हैं।
शेयर बाज़ार में गिरावट
खबर के बाद रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के शेयरों में पिछले दो दिनों में करीब 9% तक की गिरावट देखी गई। निवेशकों के भरोसे पर इस विवाद का सीधा असर पड़ा है।
मुख्य तथ्य सारणी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| सेटलमेंट याचिका | SEBI ने अनिल अंबानी और सहयोगियों की याचिका खारिज की |
| विवाद | ₹2,150 करोड़ एटी-1 बॉन्ड निवेश, कथित कर्ज के बदले में |
| निवेशक नुकसान | ₹1,828 करोड़ |
| आगे की कार्रवाई | मुआवज़ा आदेश, जुर्माना और ED जांच |
| मार्केट प्रतिक्रिया | रिलायंस पावर और इन्फ्रा में 9% तक गिरावट |
Anshika Media का दृष्टिकोण:
यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता की अहमियत को दोहराता है। भारतीय नियामक अब सख्त रुख अपना रहे हैं और ऐसे विवाद निवेशकों के विश्वास पर गहरा असर डालते हैं।

