लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 36 जिलों में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लगभग 6.5 लाख लोगों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्यों की एक बड़ी योजना का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है। इस योजना के तहत प्रभावित इलाकों में तेजी से राहत सामग्री, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
प्रदेश के 1,877 से अधिक गांवों में बाढ़ की वजह से भारी तबाही हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 2,610 नावों और मोटरबोटों की सहायता से प्रभावित लोगों तक तुरंत बचाव एवं सहायता पहुंचाई जा रही है। अब तक लाखों भोजन पैकेट वितरित किए गए हैं, और स्थानीय स्तर पर सामुदायिक रसोई भी लगातार काम कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए 1,124 चिकित्सा दल सक्रिय हैं जो बाढ़ पीड़ितों का उपचार कर रहे हैं। साथ ही, जल जनित रोगों से बचाव के लिए लाखों क्लोरीन टैबलेट और ORS पैकेट भी वितरित किए गए हैं।
इस आपदा में विस्थापित हुए 65,437 लोगों के लिए 475 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां उन्हें ठहराने और उनकी देखभाल का पूरा प्रबंध है। राहत कार्यों की निगरानी के लिए 1,517 फ्लड पोस्ट पूरे इलाके में सक्रिय हैं, जो हर समय स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
सरकार के वरिष्ठ मंत्री भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत सामग्री का वितरण कर रहे हैं और प्रभावित परिवारों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। वाराणसी से दयाशंकर मिश्रा ‘दयालु’ और रविंद्र जायसवाल ने साफ-सफाई और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने गोंडा और बहराइच के हालात का जायजा लिया और भरोसा दिलाया कि राहत कार्यों में संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
फतेहपुर, प्रयागराज, बलिया समेत कई जिलों के मंत्री भी राहत कार्यों की गति तेज करने और प्रभावितों को उचित मुआवजा दिलाने में जुटे हुए हैं।
इस बड़े राहत अभियान में अयोध्या, बाराबंकी, बस्ती, हरदोई, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज और अन्य जिलों को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में सरकार ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए तेजी से कदम उठाए हैं, जिससे संकट की घड़ी में लोगों को आवश्यक मदद और सुरक्षा मिल सके।

