फतेहपुर (उत्तर प्रदेश) – जिले के आबूनगर इलाके में मंदिर-मज़ार विवाद ने अचानक उग्र रूप ले लिया, जब कुछ युवकों ने एक 200 साल पुराने मकबरे की छत पर चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया। इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध में जमा हो गए, जिसके चलते पत्थरबाजी भी हुई।
घटना का सिलसिला
करीब 10 बजे सुबह, बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठन के सदस्य ईदगाह क्षेत्र में स्थित इस मकबरे के पास इकट्ठा हुए। उनका कहना था कि संरचना में मौजूद कमल और त्रिशूल जैसे चिन्ह इस बात का प्रमाण हैं कि यह स्थल पहले मंदिर था। कुछ लोगों ने मकबरे के ऊपर चढ़कर भगवा झंडा लगा दिया। इसके तुरंत बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध में जुट गए और पत्थरबाजी होने लगी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
तनाव बढ़ने की सूचना मिलते ही जिले के कई थानों—सदर, राधा नगर, मलवा और हुसैनगंज—की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को बैरिकेड लगाना पड़ा और लोगों को हटाने के लिए समझाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद भीड़ डाक बंगला चौराहे तक पहुंच गई और सड़क जाम कर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगी।
स्थिति की गंभीरता देखते हुए बांदा और कौशांबी से भी अतिरिक्त फोर्स बुलाई गई। मौके पर एएसपी, सीओ और एडीएम मौजूद रहे।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद ईदगाह इलाके में स्थित नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर है, जिसे हिंदू संगठन “प्राचीन ठाकुर जी का मंदिर” बताते हैं। चार दिन पहले “मठ मंदिर संघर्ष समिति” ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस स्थल को मंदिर घोषित करने की मांग की थी और दावा किया था कि यहां अराजकतत्वों द्वारा मंदिर का अस्तित्व समाप्त करने की कोशिश हो रही है।
समिति ने घोषणा की थी कि 11 अगस्त को जन्माष्टमी के अवसर पर वे स्थल की सफाई कर पूजा करेंगे। इसी को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क था और रविवार सुबह से ही मकबरे के बाहर पुलिस बल तैनात था।
शांति बनाए रखने की अपील
जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है और पूरे मामले की जांच के लिए राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संवेदनशील कार्रवाई से पहले दस्तावेज़ और ऐतिहासिक साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

