सलोनी तिवारी: कानपुर। मानवता की सेवा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा को अपना कर्तव्य मानने वाले न्यूरो सर्जन डॉ. विकास शुक्ला ने बीते 11 वर्षों में 500 से अधिक पेड़ लगाकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वे मानते हैं कि यह सेवा भी भगवान की कृपा से संभव हो पाई है।
डॉ. विकास शुक्ला न केवल वृक्षारोपण करते हैं, बल्कि उनकी देखभाल का भी विशेष संकल्प लेते हैं। चाहे वह अस्पताल परिसर हो, सड़क किनारे की खाली जमीन या किसी स्कूल का मैदान — उन्हें जहां भी स्थान मिलता है, वहां वे पर्यावरण संरक्षण के अपने संकल्प को साकार करते हैं।
उनका कहना है कि “पेड़ लगाना सिर्फ पर्यावरण सुधार का साधन नहीं है, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य उपहार है। जैसे हम मरीज़ों की जान बचाने का कार्य करते हैं, वैसे ही धरती की साँसों को बचाने का माध्यम वृक्ष हैं।”
डॉ. विकास शुक्ला की यह पहल सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी सराहनीय है। उनका यह कार्य उन सभी के लिए प्रेरणा है जो प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी अपील की कि “हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल का जिम्मा भी खुद उठाना चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा।”
डॉ. विकास शुक्ला जैसे जागरूक नागरिकों की वजह से समाज में हरियाली और चेतना दोनों का प्रसार हो रहा है।


