नवदीप चतुर्वेदी: हम अक्सर महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। नारे लगते हैं, योजनाएं बनती हैं, और मंचों से बड़े-बड़े भाषण दिए जाते हैं कि महिलाएं एक-दूसरे की ताकत बनें, एक-दूसरे को आगे बढ़ाएं। परंतु जब हम समाज की जमीनी हकीकत को देखते हैं, तो एक कटु सच्चाई सामने आती है – कई बार एक महिला ही दूसरी महिला की सबसे बड़ी विरोधी बन जाती है।
ईर्ष्या की जड़ें और मानसिकता की गिरफ़्त
एक कामयाब महिला जब समाज में आगे बढ़ती है, तो उससे प्रेरणा लेने की जगह कई बार उसके जैसी ही दूसरी महिलाएं ईर्ष्या, जलन और हीन भावना से भर जाती हैं। जब खुद के अंदर उस स्तर तक पहुँचने की योग्यता या आत्मविश्वास नहीं होता, तो वे उसकी आलोचना, चरित्रहनन और असफलता की प्रार्थना तक करने लगती हैं। यह ईर्ष्या धीरे-धीरे वैमनस्य में बदल जाती है, और फिर वह महिला जो खुद समाज की नज़रों में ऊपर उठ चुकी होती है – उसे अपनी ही बहनों से संघर्ष करना पड़ता है।
महिला बनाम महिला: यह कैसी विडंबना?
यह विडंबना ही है कि जिस समाज में महिलाएं एकजुट होकर बदलाव ला सकती हैं, वहीं अक्सर आपसी टकराव और कुंठा के चलते वे खुद ही एक-दूसरे को गिराने लगती हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, कार्यस्थलों, सामाजिक संस्थाओं और यहां तक कि परिवारों में भी देखने को मिलता है।
कारण क्या हैं?
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प्रतिस्पर्धा की नकारात्मक सोच: जब प्रतियोगिता सहयोग की जगह ईर्ष्या में बदल जाए।
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अपूर्ण आत्मविश्वास: खुद को कम आंकने वाली महिलाएं दूसरों की सफलता को स्वीकार नहीं कर पातीं।
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पुरुष-प्रधान मानसिकता की छाया: सदियों से दबे हुए मन को जब थोड़ी आज़ादी मिलती है, तो वे उसी ढांचे में दूसरों को भी दबाना चाहती हैं।
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सामाजिक असुरक्षा: महिलाएं कई बार सोचती हैं कि अगर कोई और आगे बढ़ गई, तो उनकी अहमियत कम हो जाएगी।
इस प्रवृत्ति को कैसे बदलें?
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एक-दूसरे की सफलता को सम्मान दें, प्रेरणा लें।
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अपनी ताकत और कमियों को समझें, आत्मविकास पर ध्यान दें।
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महिला-से-महिला संवाद बढ़ाएं – स्वस्थ और सकारात्मक बातचीत से गलतफहमियां दूर होती हैं।
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‘साथ चलो’ की भावना को अपनाएं, ‘आगे निकलो’ की जिद छोड़ें।
जब महिलाएं एक-दूसरे की राह का काँटा बन जाती हैं, तो सिर्फ एक महिला नहीं, पूरा समाज पिछड़ता है। सशक्तिकरण का असली मतलब है – एक-दूसरे को आगे बढ़ने की जगह देना, न कि पीछे खींचना। अगर महिलाएं एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो न सिर्फ वे खुद सशक्त बनेंगी, बल्कि समाज की दिशा भी बदल देंगी।


Nice post