सलोनी तिवारी: उज्जैन : श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी नागपंचमी के दिन महाकालेश्वर मंदिर परिसर के तीसरे तल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन के लिए खोले जाते हैं। यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत विशेष और दुर्लभ होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस एक glimpse (झलक) के लिए पूरे साल इंतजार करते हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर की विशेषता:
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तीसरी मंजिल पर स्थित यह मंदिर आम दिनों में पूरी तरह बंद रहता है।
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सिर्फ नागपंचमी के दिन 24 घंटे के लिए दर्शन हेतु इसके द्वार खोले जाते हैं।
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यहाँ शिवलिंग पर शेषनाग की छत्रछाया में भगवान शिव और देवी पार्वती की दुर्लभ मूर्ति स्थित है।
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यह मूर्ति लगभग 11वीं शताब्दी की काशी शैली की है और अद्वितीय शिल्पकला का उदाहरण मानी जाती है।
दर्शन का महत्व:
धार्मिक मान्यता है कि नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन मात्र से ही सर्पदोष, कालसर्प योग, पितृ दोष जैसी तमाम ज्योतिषीय बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
यह भी कहा जाता है कि नागपंचमी के दिन भगवान शिव स्वयं अपने नागों के साथ यहां भक्तों को दर्शन देने आते हैं।
दर्शन व्यवस्था:
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मंदिर प्रबंधन द्वारा दर्शन व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित की जाती है।
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस, होमगार्ड्स और स्वयंसेवकों की तैनाती की जाती है।
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इस साल भी सुबह 4 बजे से ही कतारें लगनी शुरू हो गईं, और रातभर भक्तों ने दर्शन का लाभ लिया।
भक्तों की श्रद्धा:
देशभर से आए भक्तों ने महाकाल के दरबार में पहले भस्म आरती के दर्शन किए और फिर नागचंद्रेश्वर मंदिर की ओर रुख किया।
महिलाओं ने नाग देवता की पूजा कर अपने परिवार और संतान की कुशलता की कामना की।

