कानपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी और जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के बीच चल रहे विवाद में बुधवार को नया मोड़ आ गया। शासन ने डॉ. नेमी का निलंबन रद्द करते हुए उन्हें पुनः कानपुर का सीएमओ नियुक्त कर दिया है, जबकि उनकी जगह लाए गए डॉ. उदयनाथ को वापस श्रावस्ती अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (ACMO) पद पर भेज दिया गया है।
निलंबन और कोर्ट की कार्यवाही
19 जून को शासन द्वारा डॉ. हरिदत्त नेमी को निलंबित कर दिया गया था। सचिव रितु माहेश्वरी के पत्र में यह आरोप था कि उन्होंने नियुक्तियों में गंभीर लापरवाही बरती। इसके बाद डॉ. नेमी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और 8 जुलाई को कोर्ट ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी, साथ ही राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब भी मांगा।
राजनीतिक समर्थन
डॉ. नेमी के पक्ष में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, भाजपा एमएलसी अरुण पाठक और विधायक सुरेंद्र मैथानी ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर उनका समर्थन किया था।
कार्यालय में टकराव
9 जुलाई को डॉ. नेमी ने पुनः सीएमओ कार्यालय पहुंचकर चार्ज लिया, लेकिन उसी समय डॉ. उदयनाथ भी वहां पहुंच गए। दोनों अफसरों के बीच कहासुनी हो गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में डॉ. नेमी को कार्यालय से बाहर निकाला गया और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई।
डीएम पर लगाए गंभीर आरोप
डॉ. नेमी ने मीडिया से बातचीत में डीएम जितेंद्र सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि डीएम ने मीटिंग में जातिसूचक शब्द कहे, अपमानित किया और एक फर्म को 30 लाख की पेमेंट के लिए दबाव बनाया।
विवाद की पृष्ठभूमि
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7 जून: डीएम व सीएमओ में कहासुनी, ऑडियो वायरल।
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11 जून: सतीश महाना ने सीएमओ के पक्ष में पत्र भेजा।
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19 जून: निलंबन आदेश जारी।
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7 जुलाई: हाईकोर्ट से निलंबन पर स्टे।
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9 जुलाई: डॉ. नेमी ने चार्ज लिया।
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10 जुलाई: पुलिस की मौजूदगी में बाहर निकाला गया।
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16 जुलाई: शासन ने डॉ. उदयनाथ को श्रावस्ती वापस भेजा और डॉ. नेमी को फिर से बहाल किया।

