“कानपुर में ई-रिक्शा बने खतरे का पहिया: अंधेरे में बिना लाइट, ओवरलोडिंग और नाबालिग चालक बढ़ा रहे दुर्घटनाएं”

नवदीप चतुर्वेदी : शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा अब यातायात का मुख्य साधन बन चुके हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही के चलते ये रिक्शा आम लोगों के लिए खतरे का कारण बनते जा रहे हैं।

रात के समय अधिकांश ई-रिक्शा बिना हेडलाइट के सड़कों पर दौड़ते हैं। अंधेरे में इनकी पहचान कर पाना मुश्किल होता है, जिससे पैदल चलने वाले या अन्य वाहन चालक अक्सर इनसे टकरा जाते हैं। यह स्थिति आए दिन दुर्घटनाओं को जन्म दे रही है। अंशिका मीडिया के रीडर एस.के. त्रिपाठी का कहना है कि इस विषय पर कानपुर नगर के जिम्मेदार अधिकारीयों को संज्ञान लेकर कार्यवाही सुनिश्चित करनी चाहिए।

इसके अलावा, कई ई-रिक्शा चालक सवारी के साथ-साथ भारी सामान जैसे लोहे के एंगल, लकड़ी, या गत्ते आदि भी लादकर चलते हैं। कुछ तो इतने लापरवाह हैं कि ये सामान रिक्शे के बाहर तक निकला होता है, जिससे साइड से निकलने वाले वाहन चालक घायल हो सकते हैं।

सबसे गंभीर स्थिति तब सामने आती है जब देखा जाता है कि कई ई-रिक्शा नाबालिग बच्चों द्वारा चलाए जा रहे हैं। न तो इनके पास ड्राइविंग का अनुभव होता है, न ही यातायात नियमों की समझ। यह खुद उनके लिए और आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

जनता की मांग:
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और यातायात विभाग से इस पर सख्त कार्यवाही की मांग की है। वे चाहते हैं कि –

  • ई-रिक्शा में काम कर रही लाइट की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए

  • ओवरलोडिंग और बाहर निकले सामान पर रोक लगाई जाए

  • नाबालिग चालकों पर विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए

ई-रिक्शा एक सुविधाजनक और सस्ता साधन जरूर है, लेकिन अगर इसमें सुरक्षा को नज़रअंदाज़ किया गया, तो यह सुविधा एक गंभीर खतरे में बदल सकती है। अब समय है कि प्रशासन, रिक्शा चालकों और आम जनता – सभी मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें।

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