इस्कॉन कानपुर में निकली भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, हजारों श्रद्धालु हुए भावविभोर

सलोनी तिवारी: कानपुर, 29 जून 2025 (रविवार) – इस्कॉन कानपुर द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री श्री जगन्नाथ, बलदेव एवं सुभद्रा महारानी की भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया। इस वर्ष की यात्रा गुलाब गेस्ट हाउस सीटीआई चौराहा से प्रारंभ होकर ग्लोरी गार्डन गेस्ट हाउस, बर्रा बायपास तक निकाली गई।

भगवान श्रीकृष्ण के ब्रज विरह भाव को समर्पित यह रथ यात्रा आध्यात्मिक रस में सराबोर रही। इसका उद्देश्य श्रीकृष्ण को द्वारका के ऐश्वर्य से वापस वृंदावन की मधुरता की ओर लाने की उस ब्रजवासी भावना को प्रकट करना है, जो भक्तों के हृदय में अनवरत विद्यमान है।

भगवान जगन्नाथ रथ पर आरूढ़ होकर भक्तों के मध्य आकर सेवा का अद्वितीय अवसर प्रदान करते हैं। इस वर्ष की यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और हरे कृष्ण महामंत्र के मधुर कीर्तन में झूमते नजर आए।

रथ यात्रा में इस्कॉन उत्तर भारत के सचिव श्रीमान देवकीनंदन प्रभु जी द्वारा अत्यंत भावपूर्ण जगन्नाथ कथा सुनाई गई। प्रभु जी ने कहा, “पुरुषोत्तम भगवान श्री जगन्नाथ ही कलयुग में हमारे एकमात्र आश्रय हैं।”

कार्यक्रम में इस्कॉन रूस से पधारे भक्तों ने भी मधुर संकीर्तन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रस में डुबो दिया। मृदंग, करताल और अन्य वाद्य यंत्रों की संगति में भव्य कीर्तन एवं नृत्य ने वातावरण को पूरी तरह श्री पुरी धाम जैसा पावन बना दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की झांकियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा के समापन पर श्रद्धालुओं को भगवान का महा प्रसाद वितरित किया गया।

इस्कॉन द्वारा आज भारत के 150 से अधिक शहरों में रथ यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है, जो भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद जी के द्वारा स्थापित वैश्विक प्रचार की प्रेरणा का परिणाम है।

विशिष्ट अतिथि जिन्होंने रथ यात्रा का उद्घाटन व आशीर्वाद प्रदान किया:

  • श्रीमान देवकीनंदन प्रभु जी, सचिव, इस्कॉन उत्तर भारत

  • जिलाधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार सिंह जी (IAS)

  • श्रीमती सौम्या पांडे जी (IAS, अपर श्रम आयुक्त) व उनके पति श्री आर. के. तिवारी जी

पुरी में भी इस्कॉन और अदानी समूह द्वारा मिलकर 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन व सेवा दी जा रही है।

यह रथ यात्रा न केवल एक धार्मिक उत्सव रही बल्कि भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा और प्रेम को जन-जन तक पहुँचाने का एक दिव्य माध्यम बन गई।

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