सलोनी तिवारी: कानपुर, 28 जून 2024 (शनिवार) को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा द्वारा “सेवा का मंदिर, परेड” स्थित ऑडिटोरियम में एक विशेष सीएमई (CME – Continuing Medical Education) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आरंभ रात्रि 8 बजे हुआ, जिसमें शहर के अनेक जाने-माने चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
विषय : “आईबीडी – निदान, उपचार और चुनौतियाँ”
कार्यक्रम तीन सत्रों में विभाजित था। प्रथम सत्र में गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पीयूष मिश्रा, डायरेक्टर एवं कंसल्टेंट, सीएन गैस्ट्रोकेयर एवं कनिष्क हॉस्पिटल, कानपुर ने “प्रति मलाशय रक्तस्राव के मामले पर दृष्टिकोण – सूजन आंत्र रोग के नैदानिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने आईबीडी के प्रारंभिक लक्षणों, नैदानिक चुनौतियों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सत्र के चेयरपर्सन: डॉ. राहुल गुप्ता एवं डॉ. महेन्द्र सिंह (एमडी पैथो, कानपुर)।
द्वितीय सत्र में डॉ. सोनल अमित (एमडी पैथो), प्रोफेसर एवं प्रमुख, पैथोलॉजी विभाग व डीन (शैक्षणिक), ऑटोनोमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, अकबरपुर, कानपुर देहात ने “कोलोनिक बायोप्सी पर आईबीडी की हिस्टोपैथोलॉजी पर अपडेट” विषय पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कोलन बायोप्सी की भूमिका एवं नई तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया।
सत्र के चेयरपर्सन: डॉ. एस.एन. सिंह, डॉ. प्रवीण सारस्वत एवं डॉ. (प्रोफेसर) विकास मिश्रा।
तृतीय सत्र में “गट फीलिंगः आईबीडी की अंतर्दृष्टि और परिदृश्य” विषय पर एक पैनल डिस्कशन आयोजित हुआ। इसमें डॉ. आशा अग्रवाल (वरिष्ठ हिस्टोपैथोलॉजिस्ट एवं निदेशक, पैथवे डायग्नोस्टिक्स लैब, लाजपत नगर, कानपुर), प्रो. डॉ. लुबना खान, डॉ. गौरव चावला (गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट), डॉ. विनय कुमार ने भाग लिया।
इस पैनल डिस्कशन का संचालन डॉ. सोनल अमित द्वारा किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए कानपुर की अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने की। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए आईबीडी जैसी बीमारियों की गंभीरता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. गणेश शंकर (वैज्ञानिक सचिव, आईएमए कानपुर) ने किया। डॉ. ए. सी. अग्रवाल (चेयरमैन, वैज्ञानिक सब कमेटी) ने आज के विषय की महत्ता पर विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन आईएमए कानपुर के सचिव डॉ. विकास मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने बताया कि आज की बदलती जीवनशैली, अस्वस्थ खान-पान और पश्चिमी प्रभावों के कारण आईबीडी (Inflammatory Bowel Disease) जैसे रोगों में तेजी से वृद्धि हो रही है। अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रॉन्स डिजीज जैसे रोगों में आंतों में सूजन की समस्या गंभीर होती जा रही है। कोलन बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी जांच के माध्यम से इन बीमारियों का सटीक निदान संभव है। विशेषज्ञों ने समय रहते सही जांच और इलाज की आवश्यकता पर बल दिया ताकि गंभीर परिणाम जैसे अत्यधिक रक्तस्राव या कोलन कैंसर से बचा जा सके।
कार्यक्रम में डॉ. कुणाल सहाय (उपाध्यक्ष, आईएमए कानपुर) एवं डॉ. कीर्ति वर्धन सिंह (संयुक्त वैज्ञानिक सचिव) की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


