सलोनी तिवारी : गाँवों की शांत सुबह से लेकर शहरों की चहल-पहल तक, कभी हर आंगन में चहकने वाली गौरैया अब गायब होती जा रही है। 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाकर लोग इस नन्हें पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
सलोनी तिवारी : गाँवों की शांत सुबह से लेकर शहरों की चहल-पहल तक, कभी हर आंगन में चहकने वाली गौरैया अब गायब होती जा रही है। 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाकर लोग इस नन्हें पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
2010 में “नेचर फॉरएवर” संगठन ने इस दिवस की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य गौरैया की घटती आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। 2012 में, घरेलू गौरैया को दिल्ली का राज्य पक्षी घोषित किया गया, जिससे इस अभियान को और बल मिला।
गौरैया कीटों की आबादी को नियंत्रित करने, परागण और बीज प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण और शहरी पारिस्थितिकी तंत्रों के संतुलन में इनकी उपस्थिति आवश्यक है।
“गौरैया बचाओ” जैसी मुहिम के तहत लोग घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध करा रहे हैं। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अभियान का समर्थन मिलने से जागरूकता में वृद्धि हुई।
गौरैया बचाने के लिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि ये नन्हें पंख फिर से हमारे आंगन और बालकनी में चहचहा सकें।