भूटान के उत्तरी हिस्से में स्थित शिंताफू तशो झील के अचानक फटने से बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। झील से निकले पानी के तेज बहाव ने भूटान के लाया क्षेत्र में भारी असर डाला है। पानी के बहाव में एक प्रमुख सड़क का हिस्सा बह जाने से दूरदराज का लाया क्षेत्र देश के अन्य हिस्सों से कट गया है। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम में भी संभावित बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, भूटान के ताकत्सेमाखांग के पास स्थित शितांफू तशो झील अचानक फट गई। इसके बाद गुरुवार रात पानी का तेज बहाव ताकत्सेमाखांग क्षेत्र तक पहुंच गया। रात में अंधेरा होने के कारण पानी की वास्तविक मात्रा और नुकसान का तत्काल आकलन नहीं हो सका। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पानी के तेज बहाव की आवाज से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा रहा था। हालांकि, अभी तक नुकसान का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।
संकोश नदी के आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता
भूटान से निकला बाढ़ का पानी मोफू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। इसे देखते हुए पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए एहतियाती अलर्ट जारी किया है।
मंत्री ने कुमारग्राम, चांगमारी और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से विशेष सतर्कता बरतने तथा परिस्थितियां बिगड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। उनके अनुसार, बाढ़ का पानी फिलहाल इन इलाकों से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर है, लेकिन पानी का बहाव आगे बढ़ने के साथ निचले क्षेत्रों में स्थिति गंभीर हो सकती है।
भूटान में भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश
झील फटने की घटना के बाद भूटान के संवेदनशील इलाकों में तैनात सेना के जवानों और अन्य लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। लाया क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क का हिस्सा बहने से संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे राहत और बचाव कार्यों के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है।
बंगाल और असम के नदी किनारे बसे गांवों पर नजर
बाढ़ के पानी के संकोश नदी की ओर बढ़ने की आशंका को देखते हुए पश्चिम बंगाल और असम में भी अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन की ओर से नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक एजेंसियों की नजर नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर बनी हुई है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान देने के बजाय आधिकारिक सूचनाओं का पालन करें और जरूरत पड़ने पर बिना देरी किए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचें।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में झीलों के अचानक फटने (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) से पैदा होने वाले खतरों की ओर ध्यान दिलाती है। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव सीमाओं से आगे तक पहुंच सकता है, इसलिए समय रहते चेतावनी और बचाव की तैयारी बेहद जरूरी है।

