विजयदशमी 2026: बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व, अपने भीतर के रावण को भी जलाने का लें संकल्प

विशेष लेख | AMD News : विजयदशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का एक प्रमुख पर्व है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की याद दिलाता है। यह दिन हमें सिखाता है कि अन्याय और अहंकार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।

भगवान श्रीराम के आदर्शों का संदेश

रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने माता सीता को रावण के बंधन से मुक्त कराने के लिए लंका पर विजय प्राप्त की थी। रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली था, लेकिन उसका अहंकार, अधर्म और अनुचित आचरण उसके पतन का कारण बना। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्य, धैर्य और मर्यादा का आदर्श प्रस्तुत करता है।

विजयदशमी हमें याद दिलाती है कि केवल शक्ति और ज्ञान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उनका सदुपयोग करना भी आवश्यक है। व्यक्ति के आचरण में विनम्रता, न्याय और दूसरों के प्रति सम्मान होना चाहिए।

आज भी प्रासंगिक है रावण के दस सिरों का प्रतीक

दशहरे पर रावण के पुतले का दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी है। आज के समय में रावण के दस सिरों को प्रतीकात्मक रूप से अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, छल, अन्याय, लालच, घृणा और असंवेदनशीलता जैसी बुराइयों से जोड़कर देखा जा सकता है।

यदि हम समाज को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो हमें इन बुराइयों को अपने व्यवहार से दूर करने का संकल्प लेना होगा। महिलाओं का सम्मान, बच्चों की सुरक्षा, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण की रक्षा और सामाजिक सद्भाव जैसे प्रयास ही त्योहार के संदेश को वास्तविक जीवन में सार्थक बनाते हैं।

समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश

विजयदशमी का पर्व परिवारों और समाज को एकजुट करने का अवसर है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रामलीला, रावण दहन, धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भगवान श्रीराम की गाथा का मंचन किया जाता है। इन आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

आज आवश्यकता है कि त्योहारों की खुशियां आपसी भाईचारे, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई जाएं। उत्सव के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

अपने भीतर की बुराइयों पर विजय का लें संकल्प

विजयदशमी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब हम केवल रावण के पुतले का दहन न करें, बल्कि अपने भीतर मौजूद बुराइयों को भी समाप्त करने का प्रयास करें। सत्य का साथ देना, गलत के विरुद्ध आवाज उठाना, अपने कर्तव्यों का पालन करना और हर व्यक्ति के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना ही इस पर्व की सच्ची भावना है।

AMD News की ओर से सभी देशवासियों को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्रीराम की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव का वास हो तथा समाज में सत्य, न्याय और मानवता की विजय हो।

जय श्रीराम!

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