कानपुर। आज के डिजिटल दौर में जिम, ब्यूटी पार्लर, हेल्थ सेंटर, डांस अकादमी और अन्य संस्थानों में महिलाओं की गतिविधियों, मेकअप, डांस, एक्सरसाइज और अन्य सेवाओं की रील्स बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना आम हो गया है। संस्थान अपने कारोबार के प्रचार-प्रसार, नए ग्राहकों को आकर्षित करने और अपनी सेवाओं की जानकारी देने के लिए इन वीडियो का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या किसी महिला की वीडियो बनाकर उसे संस्थान के प्रचार में इस्तेमाल करना कानूनी है? क्या इसके लिए महिला की अनुमति लेना जरूरी है?
कानूनी दृष्टि से इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात है महिला की सहमति, वीडियो बनाने का उद्देश्य और उसके इस्तेमाल का तरीका। किसी संस्थान में सेवा लेने पहुंचने वाली महिला की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि उसने अपने आप वीडियो बनाने या उसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की अनुमति दे दी है।
बिना अनुमति प्रचार में वीडियो का इस्तेमाल करना पड़ सकता है भारी
यदि कोई महिला जिम में एक्सरसाइज कर रही है, पार्लर में मेकअप करवा रही है, हेल्थ सेंटर में कोई गतिविधि कर रही है या डांस अकादमी में अभ्यास कर रही है, तो उसकी जानकारी और सहमति के बिना वीडियो बनाना या उसे प्रचार के लिए इस्तेमाल करना निजता और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।
विशेष रूप से तब स्थिति गंभीर हो सकती है, जब वीडियो महिला की जानकारी के बिना रिकॉर्ड किया गया हो, उसे किसी दूसरे उद्देश्य से बनाया गया हो या बाद में उसकी अनुमति के बिना विज्ञापन, रील्स अथवा अन्य प्रचार सामग्री में इस्तेमाल किया गया हो। यदि वीडियो आपत्तिजनक, अश्लील, अपमानजनक या निजता का गंभीर उल्लंघन करने वाला है, तो परिस्थितियों के अनुसार संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
हालांकि, हर ऐसी रिकॉर्डिंग को अपने आप अपराध नहीं कहा जा सकता। कानूनी स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि रिकॉर्डिंग कहां और कैसे की गई, महिला की सहमति थी या नहीं, वीडियो में क्या दिखाया गया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
सहमति का मतलब सिर्फ कैमरे के सामने खड़े होना नहीं
कई बार पार्लर, जिम या अन्य संस्थानों में कर्मचारियों द्वारा रील्स बनाई जाती हैं। महिला कैमरे के सामने तैयार होती है या एक्सरसाइज करती है और बाद में वीडियो को इंस्टाग्राम, फेसबुक अथवा अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दिया जाता है। कुछ मामलों में महिला को यह जानकारी होती है कि वीडियो बनाया जा रहा है, लेकिन उसे यह नहीं बताया जाता कि वीडियो संस्थान के व्यावसायिक प्रचार में इस्तेमाल होगा या उसे विज्ञापन के रूप में चलाया जाएगा।
ऐसी स्थिति से बचने के लिए संस्थानों को वीडियो बनाने और उसके इस्तेमाल से पहले स्पष्ट सहमति लेनी चाहिए। महिला को बताया जाना चाहिए कि वीडियो कहां पोस्ट होगा, उसका उद्देश्य क्या है और क्या उसे पेड विज्ञापन या अन्य प्रचार सामग्री में भी इस्तेमाल किया जाएगा।
सहमति स्वैच्छिक और स्पष्ट होनी चाहिए। केवल संस्थान में प्रवेश करने, सेवा लेने, कैमरे के सामने आने या किसी कर्मचारी के कहने पर वीडियो बनवा लेने को हर परिस्थिति में व्यापक प्रचार की अनुमति नहीं माना जा सकता।
महिलाओं की निजता और गरिमा का सम्मान जरूरी
महिलाओं को यह समझना चाहिए कि वे किसी भी जिम, पार्लर, हेल्थ सेंटर या डांस अकादमी में अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार सेवाएं लेने जाती हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड करके सार्वजनिक कर दिया जाए।
विशेषकर चेंजिंग रूम, शौचालय या अन्य निजी स्थानों पर रिकॉर्डिंग अत्यंत गंभीर मामला हो सकता है। ऐसी जगहों पर महिलाओं की निजता का उल्लंघन करने वाली रिकॉर्डिंग परिस्थितियों के अनुसार आपराधिक कानून के अंतर्गत कार्रवाई का आधार बन सकती है।
यदि किसी वीडियो में महिला की छवि, पहचान या गरिमा को नुकसान पहुंचाया गया है, अथवा वीडियो का इस्तेमाल उसे परेशान करने, बदनाम करने या अनुचित लाभ लेने के लिए किया गया है, तो मामले के तथ्यों के अनुसार अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
संस्थान संचालक भी रखें इन बातों का ध्यान
जिम, ब्यूटी पार्लर, हेल्थ सेंटर और डांस अकादमी संचालकों को अपने संस्थान की प्रचार रणनीति बनाते समय कुछ जरूरी बातों का पालन करना चाहिए। वीडियो रिकॉर्ड करने से पहले संबंधित महिला को इसकी जानकारी दें और प्रचार के लिए स्पष्ट अनुमति प्राप्त करें। वीडियो का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए करें, जिसके लिए सहमति दी गई है। अनुमति को लिखित या डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना बेहतर है।
यदि महिला वीडियो पोस्ट करने पर आपत्ति जताती है, तो उसकी शिकायत को गंभीरता से लें और जहां संभव हो, संबंधित सामग्री हटाने या आगे उसका इस्तेमाल रोकने के अनुरोध पर कार्रवाई करें। किसी ग्राहक पर वीडियो बनवाने के लिए दबाव न डालें और न ही वीडियो बनवाने से इनकार करने पर उसके साथ भेदभाव करें।
संस्थान संचालकों को यह भी समझना चाहिए कि सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर देने के बाद उसकी पहुंच तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए किसी महिला की पहचान, निजता और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
महिलाओं के लिए जागरूकता संदेश
महिलाएं किसी भी संस्थान में रील्स या वीडियो बनवाने से पहले कुछ सवाल जरूर पूछें। क्या वीडियो केवल निजी उपयोग के लिए बनाया जा रहा है या सोशल मीडिया पर पोस्ट होगा? क्या उसका इस्तेमाल संस्थान के विज्ञापन और व्यावसायिक प्रचार में भी किया जाएगा? क्या वीडियो को भविष्य में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है?
यदि आप वीडियो बनवाना नहीं चाहती हैं, तो साफ मना कर सकती हैं। यदि आपकी अनुमति के बिना वीडियो पोस्ट किया गया है, तो संबंधित संस्थान को लिखित शिकायत देकर वीडियो हटाने की मांग करें। वीडियो का लिंक, स्क्रीनशॉट, पोस्ट की तारीख और अन्य उपलब्ध साक्ष्य सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर पुलिस या साइबर अपराध से संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करें। ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in का उपयोग भी किया जा सकता है। तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें।
महिलाओं के लिए खास संदेश: आपकी सहमति, आपकी निजता और आपकी गरिमा महत्वपूर्ण हैं। किसी भी संस्थान को अपनी सेवाओं के प्रचार के लिए आपकी तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल करने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। अपनी शर्तें स्पष्ट रखें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।
कानून का पालन भी जरूरी, जागरूकता भी
डिजिटल प्रचार कारोबार बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। जिम, पार्लर, हेल्थ सेंटर और डांस अकादमी संचालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी प्रचार गतिविधियां महिलाओं की निजता और गरिमा का सम्मान करें। वहीं महिलाओं को भी अपनी सहमति और वीडियो के इस्तेमाल की शर्तों के बारे में स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए।

