कानपुर में नाबालिगों के हाथों में ई-रिक्शा की कमान, सड़क सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

कानपुर। शहर की सड़कों पर नाबालिगों द्वारा ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा चलाए जाने का मामला यातायात सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कई स्थानों पर कम उम्र के लड़के इन वाहनों को चलाते दिखाई देते हैं। आरोप है कि कुछ चालक लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क पर चलने वाले राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और अन्य वाहन सवारों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। व्यस्त सड़कों और बाजारों में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

कानपुर में ऑटो और ई-रिक्शा आम लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन हैं। ऐसे में इनके चालकों का यातायात नियमों की जानकारी रखना और जिम्मेदारी से वाहन चलाना बेहद जरूरी है। कम उम्र में वाहन चलाने वाले बच्चों के पास पर्याप्त अनुभव और सड़क पर अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों से निपटने की समझ का अभाव हो सकता है। ऐसे में तेज गति, अचानक मोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।

इस समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आखिर नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए कौन दे रहा है। यदि वाहन मालिक या अभिभावक कम उम्र के बच्चों को ऑटो या ई-रिक्शा चलाने की अनुमति देते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी की भी जांच होनी चाहिए। मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित आयु और वैध ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सामान्य मोटर वाहन चलाने के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। निर्धारित शर्तों के तहत 16 वर्ष की आयु में कुछ गियररहित दोपहिया वाहनों के लिए लाइसेंस का प्रावधान है, लेकिन यह छूट ऑटो रिक्शा या ई-रिक्शा चलाने पर लागू नहीं होती।

शहर में यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए यातायात पुलिस और परिवहन विभाग को इस मामले में प्रभावी निगरानी करने की जरूरत है। प्रमुख चौराहों, बाजारों और व्यस्त मार्गों पर जांच अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए कौन उपलब्ध करा रहा है। अभिभावकों और वाहन मालिकों को जागरूक करना भी जरूरी है, ताकि वे बच्चों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।

सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि वाहन चालकों और वाहन मालिकों को भी यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। कानपुर की सड़कों पर नाबालिगों द्वारा ऑटो और ई-रिक्शा चलाए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए समय रहते कदम उठाना आवश्यक है, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले इस समस्या पर नियंत्रण किया जा सके। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस दिशा में कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।

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