झांसी। झांसी से कानपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर इन दिनों सड़क के बड़े-बड़े गड्ढे वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। खासकर झांसी से उरई के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत ऐसी है कि रात के समय वाहन चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा तक नहीं लग पाता और अचानक वाहन गड्ढे में गिरने से टायर फटने, रिम टेढ़े होने और वाहन के अन्य हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
रात में परिवार के साथ सफर करना बना जोखिम
सबसे गंभीर सवाल हाईवे पर रात के समय सफर करने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर है। अंधेरे में जब सड़क पर अचानक कोई बड़ा गड्ढा सामने आता है तो तेज रफ्तार वाहन को संभालना मुश्किल हो जाता है। कई बार चालक गड्ढे से बचने के लिए अचानक ब्रेक लगाता या वाहन मोड़ता है, जिससे पीछे से आ रहे वाहन से टक्कर का खतरा भी बढ़ जाता है।
यदि गड्ढे में वाहन का टायर फट जाए या रिम क्षतिग्रस्त हो जाए तो सुनसान हाईवे पर परिवार के साथ फंसे यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है।
‘मदद’ के लिए फोन किया तो मिला पंचर की दुकान तलाशने का सुझाव?
यात्रियों का आरोप है कि रात में ऐसी स्थिति आने पर जब हाईवे से संबंधित आपातकालीन नंबर पर संपर्क किया जाता है, तो NHAI की ओर से फोन पर संपर्क करने वाली टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराने के बजाय आसपास पंचर की दुकान तलाशने की सलाह दी जाती है। यह बेहद गंभीर मामला है। हाईवे पर किसी वाहन का टायर फटना केवल वाहन खराब होने की घटना नहीं है, बल्कि रात के समय यह यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा आपातकालीन मामला बन सकता है।
सवाल यह है कि यदि परिवार बच्चों और बुजुर्गों के साथ रात में हाईवे पर फंस जाए तो क्या उसे अपनी सुरक्षा और मदद की पूरी जिम्मेदारी खुद उठानी होगी?
NHAI की पेट्रोलिंग व्यवस्था पर भी सवाल
जुलाई 2026 में बारिश के दौरान हाईवे की निगरानी के लिए टीमों के गठन और पेट्रोलिंग के जरिए सड़क पर दरारों तथा जलभराव जैसी समस्याओं का निरीक्षण कर त्वरित कार्रवाई करने की जानकारी भी सामने आई थी।
ऐसे में अब सवाल उठता है कि यदि हाईवे पर बड़े गड्ढे मौजूद हैं और वाहन लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, तो उनकी पहचान और तत्काल मरम्मत क्यों नहीं हो रही?
प्रशासन और NHAI से जनता के सीधे सवाल
क्या हाईवे पर बने इन गड्ढों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है?
क्या दुर्घटना या वाहन खराब होने की स्थिति में पेट्रोलिंग टीम वास्तव में मौके पर पहुंचती है?
रात में परिवार के साथ फंसे यात्रियों के लिए तत्काल सहायता की व्यवस्था क्या है?
क्या हाईवे पर खतरनाक गड्ढों के आसपास पर्याप्त चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—टोल वसूलने वाले हाईवे पर सुरक्षित यात्रा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
यह मुद्दा किसी एक वाहन चालक की परेशानी नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। प्रशासन और NHAI को चाहिए कि झांसी-उरई मार्ग का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर खतरनाक गड्ढों को चिन्हित कराया जाए, उनकी प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जाए और रात के समय आपात स्थिति में यात्रियों को वास्तविक मौके पर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सड़क पर गड्ढा सिर्फ असुविधा नहीं—यह किसी परिवार के लिए जानलेवा हादसे की वजह बन सकता है। अब जरूरत कार्रवाई की है, सिर्फ आश्वासन की नहीं।
