कानपुर में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) का एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। जवान ने आरोप लगाया कि अस्पतालों की लापरवाही के कारण उसकी मां का हाथ काटना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जवान की मां को 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि वहां इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद 14 मई को उन्हें पारस हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान महिला के हाथ में तेजी से संक्रमण फैल गया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि 17 मई को डॉक्टरों को हाथ काटना पड़ा।
आईटीबीपी जवान ने आरोप लगाया कि महज 24 घंटे के भीतर संक्रमण इतना कैसे बढ़ गया कि हाथ काटने की नौबत आ गई। उसका कहना है कि शुरुआती इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसकी वजह से उसकी मां को यह दर्दनाक स्थिति झेलनी पड़ी।
मामले ने उस समय और सनसनी फैला दी, जब जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ फ्रीजर में सुरक्षित रखकर अधिकारियों के पास पहुंचा और न्याय की मांग की। जवान ने संबंधित अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उसने कहा कि उसकी मां की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका है।
कमिश्नर कार्यालय में कटे हाथ के साथ पहुंचे जवान को देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हैरान रह गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए गए।
सहायक पुलिस आयुक्त (स्टाफ ऑफिसर) अमरनाथ के अनुसार, आईटीबीपी की 32वीं बटालियन के जवान ने अपनी मां के इलाज में लापरवाही की शिकायत की है। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि महिला को पहले आईटीबीपी अस्पताल से रेफर किया गया था। रास्ते में दर्द बढ़ने पर उन्हें कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि बाद में पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा।
पुलिस ने बताया कि डीसीपी पूर्वी की ओर से पूरे मामले की जांच के लिए सीएमओ कानपुर नगर को पत्र भेजा गया है। कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल दोनों की भूमिका की जांच कराई जाएगी। साथ ही कटे हुए हाथ का फोरेंसिक परीक्षण भी कराया जाएगा, ताकि संक्रमण और इलाज की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

