हर साल 29 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व नृत्य दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और अभिव्यक्ति का महापर्व है। यह दिन उन कलाकारों को समर्पित होता है, जो नृत्य के माध्यम से भावनाओं को जीवंत करते हैं और समाज को अपनी कला से जोड़ते हैं। वर्ष 2026 में इस खास अवसर पर अगर किसी उभरते और प्रेरणादायक नाम की चर्चा की जाए, तो उसमें कथक नृत्यांगना सौम्या गुप्ता का नाम प्रमुखता से लिया जाना स्वाभाविक है।
सौम्या गुप्ता एक प्रशिक्षित और समर्पित कथक कलाकार एवं कोरियोग्राफर हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से नृत्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने सी एस जे एम यूनिवर्सिटी कानपुर से कथक में (M.A.) परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की और अपने कठिन परिश्रम व लगन से एक अलग पहचान बनाई। उनकी प्रस्तुतियों में शास्त्रीयता की गहराई के साथ-साथ आधुनिकता की झलक भी देखने को मिलती है, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
सौम्या की विशेषता उनकी परफेक्शन और अभिव्यक्ति की सटीकता है। उनके हर भाव, हर मुद्राएं और हर ताल में एक अलग ही कहानी छिपी होती है। उन्होंने कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दी हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
न केवल एक कलाकार के रूप में, बल्कि एक डांस टीचर के रूप में भी सौम्या गुप्ता ने कई विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र-छात्राएं नृत्य की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं, जो उनके योगदान को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
अपनी कला और समर्पण से पहचान बनाने वाली इस प्रतिभाशाली नृत्यांगना ने सफलता की ऊँचाइयों को छूते हुए अपने पूजनीय गुरुओं—स्वर्गीय कृष्ण दयाल श्रीवास्तव जी, पद्म विभूषण स्वर्गीय पंडित बिरजू महाराज जी, राम बाबू भट्ट जी तथा अन्य अनेक गुरुओं को अपनी उपलब्धियों का श्रेय दिया है।
शास्त्रीय कथक में पूर्ण निपुणता हासिल करने के साथ-साथ उन्होंने वेस्टर्न, बॉलीवुड एवं फ्रीस्टाइल नृत्य शैलियों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास स्थान दिलाया है।
उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां देकर कला जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास ने उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान भी दिलाए हैं।
इन उपलब्धियों में उनके कॉलेज द्वारा दिया गया “डांसिंग क्वीन” का खिताब विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसके अलावा, महान बॉलीवुड नृत्य गुरु स्वर्गीय सरोज खान जी द्वारा उन्हें “महागुरु” की उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है, जो उनके कला कौशल का प्रमाण है।
इतना ही नहीं, उन्होंने प्रयागराज के प्रसिद्ध दिव्य कुंभ में भी अपनी प्रस्तुति देकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
उनकी यह यात्रा न केवल उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर सौम्या गुप्ता जैसी कलाकार हमें यह सिखाती हैं कि नृत्य केवल शरीर की गति नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। उनकी यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखता है।
इस खास दिन पर हमें ऐसे कलाकारों के प्रयासों को सराहना चाहिए और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।


