वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी के रूप में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे जानकी नवमी भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 25 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मिथिला के राजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान जब वे स्वयं हल चलाकर भूमि जोत रहे थे, तब पृथ्वी से एक दिव्य बालिका प्रकट हुई। यह बालिका ही माता सीता थीं, जिन्हें राजा जनक ने अपनी पुत्री के रूप में अपनाया।
धार्मिक दृष्टि से ‘सीता’ शब्द का अर्थ हल की नोक से जोती गई भूमि होता है, इसी कारण उस बालिका का नाम ‘सीता’ रखा गया। माता सीता त्याग, धैर्य, पवित्रता और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान राम और माता सीता की विधि-विधान से पूजा करते हैं। मान्यता है कि सीता नवमी का व्रत और पूजन करने से व्यक्ति को 16 महादानों के समान पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, पृथ्वी दान और समस्त तीर्थों के दर्शन के बराबर फल भी मिलता है।
सीता नवमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और मर्यादा का संदेश देता है तथा समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।

