लोकसभा में गिरा 131वां संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका

नई दिल्ली: महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक वर्ष 2026 लोकसभा में पास नहीं हो सका। सदन में लंबी चर्चा और वोटिंग प्रक्रिया के बावजूद यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाया, जिसके चलते इसे लोकसभा में ही खारिज कर दिया गया।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के दौरान सदन में मौजूद 489 सांसदों में से 278 ने बिल के पक्ष में और 211 ने विरोध में मतदान किया। हालांकि बाद में जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट दर्ज किए गए। बावजूद इसके, यह संख्या आवश्यक बहुमत से कम रही, जिससे विधेयक पारित नहीं हो सका।

इस बीच, सरकार ने इस बिल के साथ लाए गए दो अन्य विधेयकों को भी वापस ले लिया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

अमित शाह का बयान: ‘महिलाओं को उनका हक दिलाकर रहेंगे’
गृहमंत्री अमित शाह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि महिला आरक्षण लागू कराने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह लगातार सरकार द्वारा लाए गए महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध करता रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर निर्माण, तीन तलाक कानून और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों का उदाहरण देते हुए विपक्ष की आलोचना की।

अमित शाह ने यह भी कहा कि “हम 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा करेंगे और अगला लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही होगा।”

संख्या बल बना सबसे बड़ी चुनौती
लोकसभा में इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए के सामने संख्या बल की बड़ी चुनौती थी। वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जो कुल सदन का लगभग 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं।

संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। यदि सभी 540 सदस्य उपस्थित रहते हैं, तो कम से कम 360 वोट जरूरी होते हैं।

ऐसे में एनडीए को या तो विपक्ष का समर्थन जुटाना पड़ता या फिर विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति सुनिश्चित करनी पड़ती। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों की भूमिका इस बिल के पारित होने में निर्णायक हो सकती थी।

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