चित्रकूट, उत्तर प्रदेश: धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी चित्रकूट में स्थित निर्मोही अखाड़ा, रामघाट का एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन स्थल है, जहां पिछले 114 वर्षों से निरंतर राम नाम का अखंड संकीर्तन हो रहा है। यह वही ऐतिहासिक स्थान माना जाता है जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान चित्रकूट पहुंचकर सबसे पहले अपना धनुष रखा और विश्राम किया था। आस्था, इतिहास और संस्कृति का यह अनमोल संगम आज अपने ही अस्तित्व के संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहा है।
निर्मोही अखाड़ा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा और भक्ति का जीवंत प्रतीक भी है। यहां हर दिन श्रद्धालु दूर-दूर से आकर राम नाम के संकीर्तन में शामिल होते हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इतना महत्वपूर्ण और प्राचीन स्थल आज बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है।
नाले के कारण बढ़ रहा खतरा
अखाड़े के किनारे से गुजरने वाला एक नाला इस समय सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। खासतौर पर बरसात के मौसम में इस नाले का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे आसपास की मिट्टी का कटाव तेज हो जाता है। लगातार हो रहे इस कटाव के कारण अखाड़े की संरचना कमजोर होती जा रही है और हर साल इसकी स्थिति और अधिक जर्जर होती जा रही है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक स्थल गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि नाले के किनारे पक्की दीवार या नाले को पक्का करने का कार्य अत्यंत आवश्यक है, जिससे मिट्टी का कटाव रोका जा सके और अखाड़े को सुरक्षित रखा जा सके। यह एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण कदम होगा, जो इस धरोहर को बचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
महंत श्री दीनदयाल दास का संघर्ष
निर्मोही अखाड़े के महंत श्री दीनदयाल दास अधिकारी पिछले लगभग दो वर्षों से इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग, नगर पालिका सहित सभी संबंधित विभागों को कई बार सूचना और प्रार्थना पत्र देकर इस मुद्दे की गंभीरता से अवगत कराया है।
महंत दीनदयाल दास का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों से मुलाकात कर भी इस विषय को उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
ऑनलाइन शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
नवंबर 2025 में इस समस्या को लेकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, जिसे जिला अधिकारी चित्रकूट, श्री पुलकित गर्ग को प्राप्त कराया गया। जिला अधिकारी द्वारा इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे जिला पर्यटन विभाग और नगर पालिका को अग्रेषित भी किया गया था।
हालांकि, शिकायत के लगभग पांच महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न तो नाले के किनारे कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ है और न ही किसी प्रकार की स्थायी समाधान की पहल दिखाई दे रही है। इससे यह साफ प्रतीत होता है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं।
श्रद्धालुओं में आक्रोश और निराशा
इस लापरवाही के चलते स्थानीय श्रद्धालुओं और अखाड़े से जुड़े लोगों में काफी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि जब देश भर में धार्मिक स्थलों के विकास और संरक्षण की बात की जा रही है, तब चित्रकूट जैसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के इस प्राचीन अखाड़े की उपेक्षा समझ से परे है।
कई श्रद्धालुओं ने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस स्थल का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक धरोहर को खो देंगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस विषय को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और जल्द से जल्द आवश्यक कार्यवाही की जाए।
प्रशासन से उम्मीदें
स्थानीय लोगों और अखाड़ा प्रबंधन को जिला अधिकारी चित्रकूट श्री पुलकित गर्ग और पर्यटन विभाग के अधिकारियों से अभी भी उम्मीद है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देंगे और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाले के किनारे पक्की दीवार का निर्माण या नाले को पक्का कर दिया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। इसके अलावा, इस स्थल को पर्यटन मानचित्र में और अधिक प्रमुखता देने के लिए भी प्रयास किए जा सकते हैं, जिससे इसके संरक्षण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकें।
चित्रकूट का निर्मोही अखाड़ा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है। यहां 114 वर्षों से चल रहा अखंड राम नाम संकीर्तन इसकी आध्यात्मिक महत्ता को और भी बढ़ाता है। ऐसे में इस प्राचीन धरोहर का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग कब तक इस ओर ध्यान देते हैं और क्या इस ऐतिहासिक स्थल को समय रहते संरक्षण मिल पाता है या नहीं। फिलहाल, निर्मोही अखाड़ा अपनी सुरक्षा के लिए प्रशासनिक सहायता का इंतजार कर रहा है।

