“अंधेरे में उम्मीद की लौ”

Saloni Tiwari (Chief Editor): AMD News: शहर की भागदौड़ से दूर, एक छोटे से गांव में राधा नाम की एक बुजुर्ग महिला रहती थी। न कोई अपना, न कोई सहारा… बस एक छोटा सा मिट्टी का घर और हर शाम जलता हुआ एक दीपक।गांव वाले अक्सर सोचते — “ये अकेली औरत हर रोज़ दीपक क्यों जलाती है?”एक दिन गांव का एक युवक, अर्जुन, उससे पूछ बैठा —“अम्मा, जब आपके पास कोई नहीं है, तो आप ये दीपक किसके लिए जलाती हैं?”
राधा मुस्कुराई और बोली —“बेटा, ये दीपक मेरे लिए नहीं… उन लोगों के लिए है, जो अंधेरे में रास्ता भटक जाते हैं।”अर्जुन हंस पड़ा — “आज के जमाने में दीपक से क्या फर्क पड़ेगा अम्मा?”राधा ने कुछ नहीं कहा…कुछ दिन बाद, तेज बारिश और आंधी ने पूरे गांव को घेर लिया। बिजली चली गई, चारों तरफ अंधेरा छा गया। उसी अंधेरे में अर्जुन का छोटा भाई कहीं खो गया।घबराए हुए लोग उसे ढूंढने लगे… तभी दूर एक हल्की सी रोशनी दिखी — वही राधा के घर का दीपक।उस रोशनी की दिशा में चलते हुए, उन्हें अर्जुन का भाई मिल गया… जो उसी दीपक की रोशनी देखकर रास्ता ढूंढ पाया था। अर्जुन की आंखों में आंसू आ गए। वो दौड़कर राधा के पास गया और बोला —“अम्मा, आज समझ आया… आपका छोटा सा दीपक किसी की जिंदगी बचा सकता है।”राधा ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा —“बेटा, जिंदगी में कभी भी अच्छाई का दीपक जलाना मत छोड़ना… क्योंकि तुम्हें नहीं पता, वो रोशनी किसके लिए उम्मीद बन जाए।”

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