श्री महाकालेश्वर मंदिर के पावन अंगना में होलिका दहन का पावन पर्व विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में सायंकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। महाकाल की नगरी उज्जैन में इस विशेष अवसर पर भक्तों ने पहले भगवान महाकाल के दर्शन किए और उसके बाद होलिका दहन कार्यक्रम में सहभागिता की।
मंदिर के आचार्यों द्वारा शुभ मुहूर्त में विधिवत पूजा-अर्चना कर होलिका प्रज्ज्वलित की गई। जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, पूरा परिसर “हर-हर महादेव” और “महाकाल की जय” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और कष्टों के निवारण की कामना की।
होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अग्नि में नकारात्मक शक्तियों का दहन होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने भक्तों के मन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
उज्जैन की पवित्र धरा पर आयोजित यह होलिका दहन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी दे गया। भक्तों का कहना था कि महाकाल के सान्निध्य में होलिका दहन का अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है।
इस प्रकार श्री महाकालेश्वर मंदिर के अंगना में संपन्न हुआ होलिका दहन भक्तों के लिए अविस्मरणीय और श्रद्धा से परिपूर्ण क्षण बन गया।

