कानपुर के PSIT College में छात्र की मौत के बाद सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल !

कानपुर। सचेंडी/पनकी क्षेत्र स्थित PSIT कॉलेज में सोमवार शाम हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया। कॉलेज कैंपस के भीतर चल रहे निर्माण कार्य के दौरान एक जेसीबी मशीन से टकराकर बीसीए फाइनल ईयर के 21 वर्षीय छात्र प्रखर सिंह की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और छात्रों ने कॉलेज प्रशासन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।

रतनलाल नगर निवासी खाद कारोबारी प्रभाकर सिंह के बड़े बेटे प्रखर सिंह सोमवार शाम करीब 5 बजे कॉलेज से छुट्टी के बाद पिछले गेट से बाहर निकल रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कैंपस के पिछले हिस्से में काफी समय से निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन वहां पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार एक तेज रफ्तार कार प्रखर की बाइक के आगे से गुजरी, जिससे सड़क पर धूल का गुबार छा गया। कम विजिबिलिटी के कारण प्रखर को सामने खड़ी जेसीबी मशीन दिखाई नहीं दी और उनकी बाइक सीधे उससे टकरा गई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्रखर के आंतरिक अंग—किडनी, फेफड़े और पैनक्रियाज—गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। साथी छात्र उन्हें तत्काल कल्याणपुर स्थित अस्पताल ले गए, जहां से हालत नाजुक होने पर सर्वोदय नगर के निजी अस्पताल रेफर किया गया। देर रात करीब 2 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

छात्रों का उग्र प्रदर्शन

मंगलवार और बुधवार को छात्र की मौत के बाद कॉलेज में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। हजारों छात्रों ने पहले शांति मार्च निकाला, लेकिन बाद में प्रदर्शन उग्र हो गया। छात्रों की मांग है कि सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, जब कक्षाएं चलती हैं, उस दौरान किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।

बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

आरोप है कि कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती और केवल अपने हितों को प्राथमिकता दी।  “क्या कॉलेज प्रशासन मृत छात्र को वापस ला सकता है?”

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। जब परिसर में भारी मशीनें चल रही हों, तो सुरक्षा घेरा, चेतावनी संकेत, ट्रैफिक कंट्रोल और विजिबिलिटी प्रबंधन जैसे बुनियादी उपाय अनिवार्य होने चाहिए।

क्या हो आगे?

  • कैंपस में निर्माण कार्य के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल

  • क्लास टाइम में निर्माण कार्य पर पूर्ण रोक

  • सीसीटीवी और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम

  • जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच और कार्रवाई

प्रखर सिंह की असमय मृत्यु ने यह साबित कर दिया कि लापरवाही की कीमत कभी-कभी एक मासूम जान से चुकानी पड़ती है। अब देखना यह है कि प्रशासन और प्रबंधन इस त्रासदी से क्या सबक लेते हैं।

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