चित्रकूट धाम के सूरजकुंड आश्रम में 1958 से निरंतर गूंज रहा श्रीराम नाम संकीर्तन, गौसेवा के साथ आध्यात्मिक साधना का केंद्र

धर्मनगरी चित्रकूट धाम में स्थित प्राचीन और पावन स्थल सूरजकुंड आश्रम आस्था, भक्ति और सेवा का अद्वितीय केंद्र है। यह वही ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल माना जाता है, जहां भगवान श्रीराम के वनवास काल के दौरान स्वयं सूर्यदेव उनके दर्शन के लिए पधारे थे। मान्यता है कि सूर्यदेव का दिव्य रथ इसी पावन भूमि पर उतरा था, जिसके कारण इस स्थान का नाम “सूरजकुंड” पड़ा।

सूरजकुंड आश्रम में 3 मार्च 1958 से अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन का शुभारंभ हुआ था, जो आज तक निरंतर जारी है। पिछले लगभग सात दशकों से यहां “श्री राम, जय राम, जय जय राम” की गूंज वातावरण को भक्तिमय बनाए हुए है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर कीर्तन में सहभागी बनते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

वर्तमान में आश्रम का संचालन एवं व्यवस्थापन महंत सरस्वती 108 श्री रामबदन दास जी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उनकी देखरेख में मंदिर की समस्त धार्मिक गतिविधियां, पूजा-अर्चना और अनुष्ठान सुव्यवस्थित रूप से संपन्न होते हैं।

आश्रम परिसर में गौसेवा का भी विशेष महत्व है। यहां संचालित गौशाला में लगभग डेढ़ सौ गायों की नियमित सेवा और देखभाल की जाती है। श्रद्धालु भी इस पुण्य कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं।

अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन, पौराणिक मान्यता और गौसेवा के संगम से सूरजकुंड आश्रम चित्रकूट धाम की धार्मिक पहचान को और भी गौरव प्रदान कर रहा है। यह स्थल आज भी सनातन परंपरा, भक्ति और सेवा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *