सलोनी तिवारी: महोबा। ऐतिहासिक सूर्य महोत्सव 2026 के तहत 13 फरवरी को मोदी ग्राउंड में पूरे दिन कला, संस्कृति और बुंदेलखंडी व्यंजनों की सुगंध बिखरी रही। यह दिन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बुंदेलखंड की मिट्टी से जुड़े पारंपरिक स्वादों के नाम भी समर्पित रहा।
मोदी ग्राउंड में आयोजित ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ प्रतियोगिता के अंतर्गत पारंपरिक तौर पर तैयार किए गए बुंदेलखंडी व्यंजनों का प्रदर्शन और स्वाद परीक्षण किया गया। स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर क्षेत्रीय पकवानों की विशिष्टता से सभी को परिचित कराया।
सादगी और पौष्टिकता की मिसाल
बुंदेलखंडी खान-पान अपनी सादगी, पौष्टिकता और देसी स्वाद के लिए जाना जाता है। प्रतियोगिता में कई ऐसे व्यंजन प्रस्तुत किए गए जिन्होंने दर्शकों और निर्णायकों का मन मोह लिया।
बुंदेलखंडी कढ़ी, जो मट्ठे या दही से बनाई जाती है, यहां की पहचान मानी जाती है। दाल और बेसन से बना चीला अपनी कुरकुरी बनावट और स्वाद के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
इसके अलावा महरिया, जो मट्ठे और कुटकी या चावल के मेल से तैयार होती है, ग्रामीण जीवन की सादगी और स्वास्थ्यवर्धक परंपरा का प्रतीक है। उत्सवों की जान माने जाने वाले ठड़ूला और बरा (उड़द दाल से बने पकवान) भी लोगों की पसंद में शामिल रहे।
भरवां मसालों से तैयार की गई बेरही (भरवां पूरियां), पौष्टिक चने का साग और स्वादिष्ट समा की खीर ने भी सभी का दिल जीत लिया।
विरासत के साथ रोजगार का अवसर
‘एक जनपद, एक व्यंजन’ पहल का उद्देश्य केवल पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि स्थानीय लघु उद्योगों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। महोत्सव में सजे स्टॉल इस बात के साक्षी बने कि बुंदेलखंड की विरासत में स्वाद के साथ-साथ रोजगार की भी अपार संभावनाएं छिपी हैं।
सूर्य महोत्सव 2026 के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब परंपरा और पहल साथ आती हैं, तो संस्कृति केवल मंच पर नहीं, बल्कि हर थाली में भी झलकती है।

