मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र धारकुंडी आश्रम के संस्थापक, महान संत पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने से संपूर्ण आध्यात्मिक जगत शोक में डूब गया है। उन्होंने 102 वर्ष की आयु में मुंबई में उपचार के दौरान शनिवार दोपहर लगभग 12 बजे अपनी देह त्याग दी।
उनके ब्रह्मलीन होने का समाचार फैलते ही देश-विदेश में फैले लाखों श्रद्धालुओं और अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई। स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का संपूर्ण जीवन धर्म, तपस्या, सेवा और मानव कल्याण को समर्पित रहा। वे सनातन परंपराओं के सच्चे संवाहक और समाज को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने वाले महान संत के रूप में विख्यात थे।
स्वामी जी के सान्निध्य और मार्गदर्शन में असंख्य लोगों ने आध्यात्मिक जीवन की राह अपनाई और आत्मिक शांति एवं सदाचार का अनुभव किया। उनका सरल जीवन, गहन तप और करुणामयी दृष्टि श्रद्धालुओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही।
मीडिया ख़बरों के अनुसार, सोमवार को धारकुंडी आश्रम परिसर स्थित समाधि स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ स्वामी जी को समाधि दी जाएगी। इस अवसर पर देशभर से संत-महात्मा, शिष्य, अनुयायी तथा हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
महान संत स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज का ब्रह्मलीन होना एक युग का अंत है, किंतु उनके उपदेश, आदर्श और आध्यात्मिक विरासत सदैव मानवता को मार्गदर्शन प्रदान करती रहेगी।

