यूआईडीएआई ने 2.5 करोड़ से अधिक मृतकों के आधार नंबर किए निष्क्रिय, पहचान धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त कदम

सलोनी तिवारी: भारत की आधार प्रणाली विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान व्यवस्था है, जिसमें वर्तमान में लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार कार्ड धारक शामिल हैं। आधार डेटाबेस की सटीकता और अखंडता बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय किए जा चुके हैं।

यूआईडीएआई का कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार नंबर निष्क्रिय करना बेहद जरूरी है, ताकि पहचान संबंधी धोखाधड़ी, फर्जी प्रमाणीकरण और आधार के दुरुपयोग से सरकारी कल्याण योजनाओं के अनधिकृत लाभ को रोका जा सके। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि आधार डेटाबेस में दर्ज व्यक्ति का पता किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का होता है, जबकि मृत्यु पंजीकरण किसी अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कराया गया होता है।

पहचान धोखाधड़ी की आशंका को कम करने और लाभों के निर्बाध वितरण को सुनिश्चित करने के लिए यूआईडीएआई ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें आधार संख्या धारकों के लिए बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक की सुविधा शामिल है, जिससे अनधिकृत प्रमाणीकरण प्रयासों को रोका जा सकता है। इसके अलावा, आधार लॉक/अनलॉक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

धोखाधड़ी को और प्रभावी ढंग से रोकने के लिए ‘जीवंतता पहचान सुविधा’ के साथ चेहरे के माध्यम से प्रमाणीकरण को लागू किया गया है, जिससे लेन-देन के समय लाभार्थी की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। ऑफलाइन सत्यापन को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित क्यूआर कोड, पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी, ई-आधार और सत्यापन योग्य प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।

यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि आधार संख्या धारकों की कोर बायोमेट्रिक जानकारी किसी भी संस्था के साथ साझा नहीं की जाती। साथ ही, सभी अनुरोधकर्ता संस्थाओं के लिए आधार डेटा वॉल्ट का उपयोग अनिवार्य किया गया है, ताकि आधार नंबरों को एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखा जा सके।

डेटाबेस की नियमित सफाई के अंतर्गत मृतकों के आधार नंबरों की डुप्लीकेशन हटाने और उन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। आधार धारकों के जनसांख्यिकीय विवरणों का अद्यतन भी केवल यूआईडीएआई द्वारा सूचीबद्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाता है।

इसके साथ ही यूआईडीएआई ने एक नया आधार ऐप भी लॉन्च किया है, जिससे आधार धारक ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं के साथ अपने सत्यापित क्रेडेंशियल्स को सुरक्षित और सहज तरीके से साझा कर सकते हैं।

यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में दी।

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