ऐतिहासिक जल संचय परंपरा को सहेजने और पुनर्जीवित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने गंभीर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सदियों पुरानी जल संरचनाएं, जो कभी नगर की जीवनरेखा हुआ करती थीं, आज उपेक्षा और प्रदूषण का शिकार हो रही हैं। इन्हीं जल धरोहरों को संरक्षित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने नगर क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक जल संरचनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।
इस क्रम में जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी के तुलसीनगर वार्ड-6 में स्थित पेशवाकालीन गोल तालाब का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तुलसीनगर के कुंजन पुरवा क्षेत्र के कई घरों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है। इसके अतिरिक्त तालाब में अत्यधिक मात्रा में जलकुंभी फैलने के कारण जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है, जिससे यह ऐतिहासिक तालाब धीरे-धीरे अपनी मूल पहचान और उपयोगिता खोता जा रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद चित्रकूटधाम कर्वी को स्पष्ट निर्देश दिए कि गोल तालाब में गिरने वाले नालों और नालियों के पानी को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसके लिए एक ठोस और प्रभावी कार्य योजना तैयार कर शीघ्र नाली निर्माण का कार्य प्रारंभ कराया जाए।
जिलाधिकारी ने सख्त शब्दों में कहा कि किसी भी ऐतिहासिक तालाब में गंदा पानी गिरना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि तालाब की नियमित सफाई, जलकुंभी हटाने और संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन ऐतिहासिक जल संरचनाओं को सुरक्षित रखा जा सके।

