कानपुर जनपद के एक छोटे से गांव शेखपुर से निकलकर देश और दुनिया तक अपनी पहचान बनाने वाले शिवराज निषाद की कहानी आज के युवाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। यह कहानी सिर्फ एक सफल व्यवसाय की नहीं है, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास, दूरदर्शिता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की मिसाल है।
जहां अधिकांश लोग सुरक्षित नौकरी को ही जीवन की अंतिम मंज़िल मान लेते हैं, वहीं शिवराज निषाद ने एक अलग रास्ता चुना—जो जोखिम भरा था, लेकिन भविष्य की संभावनाओं से भरा हुआ।
सुरक्षित नौकरी से असुरक्षित रास्ते तक का साहसिक फैसला
शिवराज निषाद ने अपने करियर की शुरुआत एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एम.आर.) के रूप में की थी। यह नौकरी सम्मानजनक थी, नियमित आय देती थी और समाज में “सुरक्षित करियर” मानी जाती थी। लेकिन शिवराज के मन में हमेशा एक सवाल उठता रहता था—
क्या जीवन का उद्देश्य सिर्फ नौकरी करना और सीमित दायरे में रह जाना है?
गांव की मिट्टी, खेतों की खुशबू और किसानों की समस्याएं उन्हें लगातार भीतर से झकझोरती थीं। नौकरी के दौरान जब भी वे गांव आते, तो देखते कि खेतों में उगे फूल, मंदिरों में चढ़ाए गए पुष्प और आयोजनों में इस्तेमाल किए गए फूल कुछ ही घंटों में कचरे में बदल जाते हैं। यह दृश्य उन्हें भीतर तक परेशान करता था।
बर्बादी में अवसर देखने की सोच
जहां लोग फूलों को सिर्फ पूजा या सजावट तक सीमित मानते थे, वहीं शिवराज ने उनमें संभावनाओं की खुशबू महसूस की। उन्होंने देखा कि ये फूल सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि औषधीय और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर हैं।
यहीं से उनके मन में एक अनोखा विचार जन्मा—
अगर इन फूलों को सही तरीके से संरक्षित और प्रोसेस किया जाए, तो क्या इससे किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है?
यह सोच आसान नहीं थी। न तो उनके पास कोई बड़ा निवेश था, न ही उद्योग चलाने का अनुभव। लेकिन उनके पास था—विश्वास और सीखने की ललक।
छोटे प्रयोग से बड़े सपने की शुरुआत
शिवराज ने सबसे पहले अपने गांव शेखपुर में ही छोटे स्तर पर प्रयोग शुरू किए। उन्होंने फूलों को सुखाने के पारंपरिक तरीकों को समझा और फिर आधुनिक तकनीक की ओर रुख किया।
यहीं से उनकी मुलाकात हुई सोलर ड्रायर तकनीक से—एक ऐसी तकनीक जो पर्यावरण के अनुकूल है और कम लागत में फूलों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है।
शुरुआत में कई असफलताएं मिलीं।
कभी फूल ठीक से सूखते नहीं थे,
कभी गुणवत्ता खराब हो जाती थी,
तो कभी बाजार नहीं मिलता था।
लेकिन शिवराज ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद रिसर्च की, विशेषज्ञों से बात की और धीरे-धीरे अपने प्रोसेस को बेहतर बनाते गए।
नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय
जब प्रयोग सफल होने लगे और परिणाम दिखने लगे, तब शिवराज के सामने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय था—
नौकरी या सपना?
एक तरफ स्थिर वेतन और दूसरी तरफ अनिश्चित भविष्य। परिवार की चिंताएं, समाज के सवाल और आर्थिक जोखिम—सब कुछ सामने था।
लेकिन शिवराज ने अपने सपनों पर भरोसा किया और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी छोड़कर पूरी तरह खेती और फूलों के व्यवसाय में उतरने का फैसला किया।
यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन यही निर्णय उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया।
“ब्लू वेदा” – एक ब्रांड नहीं, एक विचार
अपने विज़न को एक पहचान देने के लिए शिवराज ने अपने ब्रांड का नाम रखा—
“Blueveda (ब्लू वेदा)”
यह नाम ही अपने आप में उनके उद्देश्य को दर्शाता है—
प्रकृति, आयुर्वेद और आधुनिक जीवनशैली का संगम।
Blueveda के तहत उन्होंने
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हर्बल टी
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ड्राइड फ्लावर
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आयुर्वेदिक वेलनेस प्रोडक्ट
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प्राकृतिक ब्यूटी और हेल्थ से जुड़े उत्पाद
तैयार करने शुरू किए।
इन सभी उत्पादों की खास बात यह थी कि वे रासायनिक मुक्त, प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक थे।
किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण
Blueveda सिर्फ एक व्यवसाय नहीं बना, बल्कि किसानों के जीवन में बदलाव की शुरुआत बन गया।
जहां पहले फूल उगाने वाले किसान सिर्फ त्योहारों और खास मौकों पर ही कमाई कर पाते थे, अब उन्हें साल भर स्थिर आमदनी मिलने लगी।
आज स्थिति यह है कि
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1000 से अधिक किसान Blueveda से जुड़े हैं
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किसानों के फूल बेहतर दाम पर खरीदे जाते हैं
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फूलों की बर्बादी लगभग खत्म हो चुकी है
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ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं
इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे पारंपरिक खेती से आगे सोचने लगे हैं।
गांव से ग्लोबल तक का सफर
शेखपुर जैसे छोटे गांव से शुरू हुआ यह सफर आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुका है।
Blueveda के उत्पाद आज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के माध्यम से शिवराज ने अपने ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
उनका मानना है कि
“अगर उत्पाद में सच्चाई और गुणवत्ता हो, तो गांव से भी ग्लोबल ब्रांड बनाया जा सकता है।”
समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी
शिवराज निषाद का विज़न सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं है।
उनकी सोच है—
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फूलों की बर्बादी रोकना
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पर्यावरण संरक्षण
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ग्रामीण युवाओं को रोजगार
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किसानों को आत्मनिर्भर बनाना
सोलर ड्रायर तकनीक का उपयोग कर वे न केवल ऊर्जा बचा रहे हैं, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचा रहे।
युवाओं के लिए संदेश
शिवराज निषाद की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो
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नौकरी से असंतुष्ट हैं
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खेती को घाटे का सौदा मानते हैं
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या संसाधनों की कमी के कारण सपने देखने से डरते हैं
उनका साफ संदेश है—
“समस्या में ही अवसर छुपा होता है। जरूरत है तो बस उसे पहचानने और उस पर विश्वास करने की।”
निष्कर्ष: एक कहानी जो बदलाव की खुशबू फैलाती है
कानपुर के शिवराज निषाद की यह यात्रा साबित करती है कि
सपने गांव में भी पल सकते हैं,
और मेहनत से उन्हें हकीकत में बदला जा सकता है।
“ब्लू वेदा” आज सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि
संघर्ष से सफलता तक की सुगंधित कहानी है—
जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
ब्लू वेदा का संपर्क विवरण
📍 Address: 26b, Village-Shekhpur Post-Kulguan, Kanpur Nagar, Uttar Pradesh, India – 208001
📱 Phone / WhatsApp: +91 79852 16940
📧 Email: iswarflowersandherbs@gmail.com
🌐 Website: www.iswarflower.com
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