सलोनी तिवारी: हिंदू पंचांग के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन दंपतियों को संतान सुख की कामना होती है या जिनकी संतान कष्ट में होती है, उन्हें श्रद्धा और विधि-विधान से पुत्रदा एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से न केवल संतान प्राप्ति होती है, बल्कि संतान संस्कारी, स्वस्थ और यशस्वी बनती है।
व्रत की विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। व्रती दिनभर उपवास रखकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करता है और रात्रि में जागरण करता है। अगले दिन द्वादशी को ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
व्रत का महत्व
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संतान सुख की प्राप्ति
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परिवार में सुख-शांति
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पितृ दोष से मुक्ति
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मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग
धार्मिक आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

