विश्व प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि 2026 का पर्व इस वर्ष अत्यंत भव्य और दिव्य रूप में मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पूरी तरह शिवमय हो गई है। मंदिर परिसर से लेकर शहर की गलियों तक “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज रहे हैं।
6 फरवरी से शुरू हुआ शिव नवरात्रि और महादेव के विवाह का उत्सव
मंदिर प्रशासन के अनुसार, 6 फरवरी 2026 से शिव नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जिसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का उत्सव भी आरंभ हो गया है। यह विशेष पर्व 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। इन नौ दिनों तक महाकालेश्वर मंदिर में विशेष श्रृंगार, पूजन, अनुष्ठान और सांस्कृतिक धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
शिव नवरात्रि का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जैसे देवी शक्ति की आराधना के लिए नवरात्रि मनाई जाती है, वैसे ही उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि मनाने की परंपरा है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं नौ दिनों तक कठोर तप और साधना की थी। इसी कारण महाशिवरात्रि से पूर्व महाकाल की नगरी में शिव नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन
इस वर्ष रविवार, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भक्तों की सुविधा को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है।
महाकालेश्वर मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे। 15 फरवरी सुबह 6 बजे से दर्शन शुरू होंगे, जो 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी ब्रेक के जारी रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालु दिन-रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे।
वर्ष में एक बार होने वाली दोपहर की भस्म आरती
महाशिवरात्रि के अगले दिन यानी 16 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे, महाकालेश्वर मंदिर में विशेष दोपहर की भस्म आरती संपन्न होगी। यह भस्म आरती वर्ष में केवल एक बार ही होती है, जिसे देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहता है।
भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों, फूलों और सप्तधान्य से बना भव्य सेहरा अर्पित किया जाता है, जो इस पर्व की सबसे विशेष झलक मानी जाती है।
चारों प्रहर होती है महादेव की पूजा
महाशिवरात्रि ऐसा पर्व है, जिसमें दिन और रात के चारों प्रहर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन शिव-पार्वती के विवाह का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, रुद्राभिषेक, शिव नाम का जाप और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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