चित्रकूट। बुंदेलखंड की समृद्ध और गौरवशाली लोक-सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में पर्यटन विभाग द्वारा एक ऐतिहासिक पहल की जा रही है। इस क्रम में बुंदेली लोककला को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की “Intangible Cultural Heritage of Humanity” सूची में शामिल कराने हेतु नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
बुंदेलखंड की पहचान उसकी विशिष्ट लोकसंस्कृति, वीरगाथाओं, लोकनृत्यों और लोकनाट्य परंपराओं से जुड़ी रही है। आल्हा लोकगाथा, बुंदेली रांग (लोकनाट्य), राई लोकनृत्य जैसे अनेक कला रूप न केवल इस क्षेत्र की ऐतिहासिक चेतना को जीवित रखते हैं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सामाजिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी सहेजते आए हैं। इन लोककलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने का यह प्रयास बुंदेलखंड के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यटन विभाग द्वारा इस प्रक्रिया के तहत बुंदेली कला रूपों से जुड़े प्रतिष्ठित कलाकारों, साधकों और गुरुओं की जानकारी संकलित की जा रही है। इसके साथ ही बुंदेली कला पर कार्य कर चुके शोधकर्ताओं, लेखकों एवं विद्वानों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, शोधपत्रों और लेखों का विवरण भी एकत्र किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त वे सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाएँ, संगठन और सांस्कृतिक मंच, जो बुंदेली कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, उनकी जानकारी भी इस नामांकन प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगी।
जिला पर्यटन कार्यालय, चित्रकूट द्वारा जनपदवासियों एवं जागरूक नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उनके पास या उनके संपर्क में बुंदेली लोककलाओं से जुड़े सम्मानित कलाकारों, शोधकर्ताओं अथवा संस्थाओं की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध हो, तो उसे निर्धारित प्रारूप में दिनांक 28 जनवरी 2026 तक जिला पर्यटन कार्यालय, चित्रकूट के ई-मेल आईडी dmchi@nic.in पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। प्राप्त सूचनाओं को संकलित कर उच्च स्तर पर प्रेषित किया जाएगा, जिससे UNESCO नामांकन की प्रक्रिया को सशक्त आधार मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बुंदेली लोककला को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिलता है, तो इससे न केवल बुंदेलखंड की सांस्कृतिक अस्मिता को वैश्विक पहचान मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों, लोकसंस्कृति के संवाहकों और पर्यटन गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्राप्त होगी। इससे आने वाली पीढ़ियों में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूकता और गर्व की भावना और अधिक मजबूत होगी।
यह पहल बुंदेलखंड की लोकपरंपराओं को संरक्षित रखने और उन्हें विश्व पटल पर स्थापित करने का एक सशक्त अवसर है। ऐसे में जनसहभागिता को इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। पर्यटन विभाग ने सभी नागरिकों से आगे आकर इस सांस्कृतिक अभियान में योगदान देने का आह्वान किया है, ताकि बुंदेलखंड की अनमोल विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान और पहचान मिल सके।

