मकर संक्रांति पर इस्कॉन कानपुर में भव्य श्रीमद्भगवद्गीता महा यज्ञ का आयोजन, दो लाख से अधिक गीता वितरण का उत्सव

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार, 14 जनवरी को इस्कॉन कानपुर में श्रीमद्भगवद्गीता महा यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन गीता के दिव्य उपदेशों के प्रचार-प्रसार और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार के उद्देश्य से किया गया, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

प्रत्येक वर्ष दिसंबर माह में मोक्षदा एकादशी से लेकर लगभग एक माह तक विश्वभर के इस्कॉन मंदिरों द्वारा “गीता मैराथन” के अंतर्गत भगवद्गीता ग्रंथ वितरण अभियान चलाया जाता है। इस वर्ष वैश्विक स्तर पर इस्कॉन ने 42 लाख भगवद्गीता वितरण का ऐतिहासिक लक्ष्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इसी क्रम में इस्कॉन कानपुर द्वारा दो लाख से अधिक भगवद्गीता का वितरण किया गया।

गीता वितरण में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए षट्तिला एकादशी एवं मकर संक्रांति के अवसर पर इस महा यज्ञ का आयोजन किया गया। श्री श्री राधा माधव जी के भव्य मंदिर प्रांगण में विशेष महा यज्ञ वेदी का निर्माण किया गया, जहां गोबर की पवित्र लिपाई और आकर्षक रंगोलियों से सुसज्जित यज्ञ कुंड में पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान हरे कृष्ण महामंत्र के सामूहिक जप, वैदिक श्लोकों के मधुर उच्चारण और यज्ञ आहुतियों की सुगंध से संपूर्ण वातावरण दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी एवं कानपुर नगर के सांसद श्री रमेश अवस्थी जी ने विशेष रूप से सहभागिता की।

दोनों अतिथियों ने विधि-विधान से पूजन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए आहुतियां दीं। डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान शाश्वत है और यह मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। वहीं सांसद श्री रमेश अवस्थी जी ने भारतीय संस्कृति और वैदिक ज्ञान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में इस्कॉन के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष श्रीमान प्रेम हरिनाम प्रभु जी द्वारा अतिथियों को अंगवस्त्र एवं भगवद्गीता की प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में भारी संख्या में श्रद्धालु, भक्तजन और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिससे यह आयोजन आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत सफल सिद्ध हुआ।

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