दिल्ली/गुजरात। सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक हमले के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पूरे देश में स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सोमनाथ धाम पहुंचे और देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास कभी भी विनाश और पराजय का नहीं रहा, बल्कि यह विजय, धैर्य और पुनर्निर्माण की गौरवशाली गाथा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर हमारे पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का जीवंत उदाहरण है। आक्रमणकारी बार-बार आए, मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से खड़ा हुआ। इतनी सदियों तक चले संघर्ष, धैर्य और पुनर्निर्माण की ऐसी मिसाल दुनिया के इतिहास में विरले ही देखने को मिलती है।
पीएम मोदी ने कहा कि 1000 साल पहले आक्रमणकारियों को यह भ्रम था कि उन्होंने इस भूमि को जीत लिया है, लेकिन आज 1000 साल बाद भी सोमनाथ मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज पूरी दुनिया को भारत की ताकत, आस्था और सभ्यतागत निरंतरता का संदेश दे रहा है।
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को ‘जय सोमनाथ’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस पावन अवसर से जुड़े हैं। देवाधिदेव महादेव की उपस्थिति, समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें और मंत्रों की गूंज इस वातावरण को दिव्य और अलौकिक बना रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2026 उस ऐतिहासिक क्षण के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जब स्वतंत्र भारत में 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोला गया था। उन्होंने कहा कि ये दोनों ऐतिहासिक पड़ाव मिलकर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की नींव बनाते हैं।
पीएम मोदी ने स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में सेवा करने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, आत्म-सम्मान और सांस्कृतिक चेतना का अमर प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देता रहेगा।

