कानपुर में तीन दिवसीय सरस आजीविका मेले का समापन, देशी हस्तशिल्प और हेल्दी फूड बना लोगों की पहली पसंद

सलोनी तिवारी: कानपुर में आयोजित तीन दिवसीय सरस आजीविका मेले का आज अंतिम दिन रहा। समापन के दिन मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खासतौर पर हाथ से बने सुंदर कड़े, चूड़ियां, मिलेट्स (मोटे अनाज) और खजूर से तैयार की गई शुगर फ्री गजक, देशी लड्डू, चॉकलेट बर्फी और पट्टी ने खूब सुर्खियां बटोरीं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते शुगर फ्री और मिलेट्स आधारित उत्पाद लोगों की पहली पसंद बने और जमकर बिके।

मेले में देशी और हाथ से बने उत्पाद आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। कानपुर मंडल के 60 से अधिक स्वयं सहायता समूहों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए, जहां 10 रुपये से लेकर 450 रुपये तक की कीमत में भगवान के वस्त्र, टोपी, स्वेटर, कंबल, गद्दे, हाथ से बनी शर्ट, साड़ी, शॉल, गोबर से बने उत्पाद, मिट्टी की कलाकृतियां और खुशबूदार इत्र उपलब्ध रहे। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए इन उत्पादों को लोगों ने न केवल सराहा बल्कि बढ़-चढ़कर खरीदा भी।

मेले के बीच हाथ से बने सुंदर कड़े के स्टॉल पर मौजूद रुचिका जी ने बताया कि ये कड़े उनके द्वारा बेहद सुंदर और बारीकी से तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहक की पसंद के अनुसार ऑर्डर पर भी कड़े बनाए जाते हैं, जिससे लोगों को अपनी पसंद का डिज़ाइन मिल सके।

मेले की रौनक तब और बढ़ गई जब कानपुर विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के छात्रों का स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना। यहां छात्रों द्वारा मौके पर ही बनाई जा रही लाइव स्केचिंग कला ने दर्शकों को खूब लुभाया और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने व बनवाने पहुंचे।

मेले की एक खास पहल यह भी रही कि इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने सभी स्टॉलों का दौरा कर स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को मार्केटिंग और ब्रांडिंग से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स दिए। छात्रों ने पैकेजिंग, प्रेजेंटेशन और सोशल मीडिया के माध्यम से उत्पादों की पहचान बढ़ाने के सुझाव दिए, जिससे भविष्य में इन समूहों की बिक्री और ब्रांड वैल्यू और मजबूत हो सके।

कुल मिलाकर सरस आजीविका मेला न सिर्फ देशी उत्पादों के प्रचार का माध्यम बना, बल्कि स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ।


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