रील्स में स्वाद, हकीकत में सवाल: कानपुर के मशहूर समोसे / स्ट्रीट फूड कितने सुरक्षित?

नवदीप चतुर्वेदी : कानपुर में इन दिनों सड़क किनारे मिलने वाले कचौड़ी, पकोड़ी, मट्ठा के साथ-साथ शहर के प्रमुख और मशहूर समोसे वाले भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। रील्स, शॉर्ट वीडियो और फूड ब्लॉग्स में इन ठेलों और दुकानों को इस तरह दिखाया जा रहा है कि स्वाद, भीड़ और लोकप्रियता देखकर लोग दूर-दूर से वहां पहुंच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल अधिकांश वीडियो में “कानपुर के सबसे मशहूर समोसे”, “भीड़ वाला समोसा पॉइंट” जैसे टैगलाइन तो होती हैं, लेकिन यह कम ही दिखाया जाता है कि समोसे और अन्य खाद्य पदार्थ किन परिस्थितियों में तैयार किए जा रहे हैं। तेल कितनी बार बदला जाता है, आलू और मसालों की सफाई कैसी है, पानी शुद्ध है या नहीं—इन सवालों पर अक्सर चुप्पी रहती है।

खास बात यह है कि कई प्रसिद्ध समोसे की दुकानों और ठेलों पर दिनभर भारी भीड़ रहती है। ऐसे में साफ-सफाई, कचरा निस्तारण और हाइजीन बनाए रखना और भी जरूरी हो जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह खुले में रखी सामग्री, बिना दस्ताने भोजन परोसना और आसपास गंदगी जैसी तस्वीरें भी आम देखने को मिल जाती हैं।

फूड ब्लॉगर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इन समोसे, कचौड़ी और पकोड़ी वालों को जमकर प्रमोट कर रहे हैं। उनके वीडियो लाखों व्यूज और लाइक्स बटोरते हैं, जिससे दुकानों की लोकप्रियता और बिक्री दोनों बढ़ती हैं। सवाल यह है कि क्या कभी किसी फूड ब्लॉगर ने इन मशहूर समोसे वालों की हाइजीन, साफ-सफाई या एफएसएसएआई मानकों पर भी फोकस किया है? अब तक ऐसे वीडियो गिनती के ही नजर आते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार किया गया तला-भुना भोजन पेट से जुड़ी बीमारियों, फूड प्वाइजनिंग और संक्रमण का कारण बन सकता है। खासकर बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल और खुले में रखी सामग्री स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

अब जरूरत इस बात की है कि उपभोक्ता केवल सोशल मीडिया ट्रेंड और वायरल वीडियो देखकर आकर्षित न हों, बल्कि अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग को चाहिए कि वायरल हो रहे स्ट्रीट फूड और मशहूर समोसे पॉइंट्स पर नियमित जांच करे। साथ ही फूड ब्लॉगर्स की भी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे स्वाद के साथ-साथ स्वच्छता और सुरक्षा के पहलुओं को भी उजागर करें।

कानपुर का समोसा और स्ट्रीट फूड शहर की पहचान जरूर है, लेकिन अगर स्वाद के साथ सेहत सुरक्षित न रही, तो यही पहचान लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

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