शीतलहर से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सतर्कता की सलाह

सलोनी तिवारी: सतना | 15 दिसम्बर 2025 शीत ऋतु में बढ़ती शीतलहर और ठंडी हवाओं के कारण आमजन को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा शीतलहर से बचाव हेतु विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक एहतियाती कदम अपनाने की अपील की है।

एडवाइजरी में बताया गया है कि प्रदेश में शीतलहर का प्रकोप प्रायः दिसंबर और जनवरी माह में देखने को मिलता है। इस दौरान विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, हृदय व श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्ति, बेघर लोग, सड़क पर रहने वाले नागरिक, निर्माण स्थलों व खुले क्षेत्रों में कार्य करने वाले श्रमिक तथा खुले में व्यवसाय करने वाले छोटे व्यापारी सबसे अधिक संवेदनशील रहते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शीतलहर एक गंभीर मौसमीय घटना है, जिसमें तापमान में अचानक गिरावट, ठंडी हवाओं की तीव्रता, पाला जमने जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। लंबे समय तक अत्यधिक ठंड के संपर्क में रहने से हाइपोथर्मिया, फ्रॉस्टबाइट, ट्रेंच फुट और चिलब्लेन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिनसे जान का खतरा भी बन सकता है।

हाइपोथर्मिया की स्थिति में क्या करें:
यदि किसी व्यक्ति में अत्यधिक ठंड के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत गर्म और सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। गीले कपड़े उतारकर सूखे कपड़े पहनाएं, कंबल या चादर से शरीर को ढकें और गर्म पेय दें। हालांकि मादक पेय पदार्थ देने से बचें। गंभीर स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।

शीतलहर से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां:

  • सर्दियों के पर्याप्त गर्म कपड़े पहले से तैयार रखें।

  • अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें।

  • शरीर को सूखा रखें, गीले कपड़े तुरंत बदलें।

  • नियमित रूप से गर्म पेय पदार्थ का सेवन करें।

  • मौसम की ताजा जानकारी के लिए रेडियो, टीवी व समाचार पत्रों पर नजर रखें।

  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

  • शीतदंश के लक्षण दिखने पर प्रभावित हिस्से की मालिश न करें, बल्कि गुनगुने पानी से धीरे-धीरे गर्म करें।

  • कंपकंपी को नजरअंदाज न करें, यह शरीर के तापमान गिरने का संकेत है।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाताओं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और सिविल सर्जनों को निर्देश दिए हैं कि वे मैदानी स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को शीतलहर से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करें।

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