“राष्ट्रीय मिर्गी दिवस: जागरूकता, समझ और इलाज से जुड़े मिथकों को तोड़ने का संकल्प”

सलोनी तिवारी: हर साल 17 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय मिर्गी दिवस (National Epilepsy Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य मिर्गी जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़े मिथकों को खत्म करना और समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है। आज भी भारत में मिर्गी को लेकर कई गलतफहमियां और अंधविश्वास मौजूद हैं, जबकि यह एक पूरी तरह उपचार योग्य मेडिकल कंडीशन है।


मिर्गी क्या है?

मिर्गी (Epilepsy) एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी असामान्य हो जाती है। इसके कारण रोगी को बार-बार दौरे (Seizures) आ सकते हैं।
इसके लक्षण व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं —

  • शरीर का अनियंत्रित झटके खाना

  • कुछ सेकंड के लिए चेतना खोना

  • भ्रम या कंफ्यूजन

  • अचानक डर या अजीब संवेदनाएं

मिर्गी किसी भी उम्र में हो सकती है। इसके पीछे कारण हो सकते हैं —
सिर की चोट, संक्रमण, जेनेटिक फैक्टर, स्ट्रोक या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।


 राष्ट्रीय मिर्गी दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस की शुरुआत Epilepsy Foundation of India ने की थी।
यह संस्था 2009 में मुंबई में डॉ. निर्मल सूरी ने स्थापित की थी।
इसका उद्देश्य—

  • मिर्गी के बारे में जागरूकता फैलाना

  • मरीजों के अधिकारों की रक्षा

  • बेहतर इलाज और परामर्श उपलब्ध कराना

इसी उद्देश्य से “National Epilepsy Day” को एक राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के रूप में मनाया जाने लगा।


 दिन का महत्व

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया जाता है—

अंधविश्वास को खत्म करना

मरीजों को अब भी “भूत-प्रेत”, “कर्म-फल” या “अशुभ संकेत” कहकर गलत नजर से देखा जाता है। यह दिन इन धारणाओं को दूर करने का प्रयास करता है।

सही इलाज की जागरूकता

मिर्गी उपचार योग्य है। दवाइयों और नियमित निगरानी से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

सामाजिक संवेदनशीलता बढ़ाना

स्कूल, कॉलेज, ऑफिस और समाज में मिर्गी को लेकर समझ विकसित करना बेहद जरूरी है।

 दौरे के समय सही प्रतिक्रिया

लोगों को यह सिखाया जाता है कि:

  • मरीज को पकड़ने या रोकने की कोशिश न करें

  • उसके आसपास जगह खाली करें

  • मुंह में कुछ न डालें

  • सिर के नीचे कपड़ा रखें

  • दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले तो तत्काल मेडिकल मदद लें

मरीजों के अधिकारों की रक्षा

उनके साथ रोजगार, शिक्षा और समाज में समान व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील की जाती है।

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