सलोनी तिवारी: नवंबर से दिसंबर की ओर बढ़ते मौसम में तापमान तेजी से गिर रहा है, जिसके चलते कोल्ड, कफ और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी क्लीनिक तक, बीते दो हफ्तों में सर्दी-जुकाम के मामलों में लगभग 30–40% तक का इजाफा दर्ज किया गया है। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग तेजी से इस वायरस की चपेट में आ रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं कोल्ड और कफ के मामले?
डॉक्टरों के मुताबिक, बदलते मौसम के दौरान शरीर का तापमान संतुलन बिगड़ने लगता है। सुबह-शाम की ठंडी हवाएं और दिन में थोड़ी गर्म धूप, इस मिश्रित मौसम में शरीर जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाता है।
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ठंडी हवाओं का असर – गले और नाक की नलियां संकुचित होकर वायरस के प्रवेश की संभावना बढ़ा देती हैं।
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प्रदूषण – स्मॉग और धूलकण भी गले में जलन पैदा करते हैं, जिससे कफ और खांसी बढ़ती है।
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कम पानी पीना – ठंड में पानी की मात्रा कम होने से शरीर डीहाइड्रेट हो जाता है और म्यूकस मोटा हो जाता है।
अस्पतालों में क्या स्थिति?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में आने वाले हर 10 मरीजों में से 6 मरीज खांसी, जुकाम, कफ और हल्के बुखार से पीड़ित पाए गए हैं।
बच्चों के डॉक्टरों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि वे समूह में अधिक समय बिताते हैं।
डॉक्टरों की सलाह
चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने और कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है:
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सुबह और शाम बाहर निकलते समय गरम कपड़ों का इस्तेमाल करें।
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गुनगुना पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
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घर में स्टीम इन्हेलेशन का इस्तेमाल करें।
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वायरस संक्रमण को रोकने के लिए हाथ धोते रहें और भीड़भाड़ से बचें।
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खांसी या तेज बुखार की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
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छोटे बच्चे
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बुजुर्ग
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दमा (Asthma) और एलर्जी वाले मरीज
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डायबिटीज या हृदय रोग से पीड़ित लोग
इनमें संक्रमण जल्दी बढ़ सकता है, इसलिए इन्हें अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।
घरेलू उपचार से मिल रही राहत
लोग घर पर काढ़ा, अदरक-हनी, तुलसी, काली मिर्च, हल्दी वाला दूध आदि का उपयोग कर रहे हैं, जिससे खांसी और कफ में काफी राहत मिल रही है। हालांकि डॉक्टर कहते हैं कि यदि लक्षण 3–4 दिन से अधिक बने रहें तो चिकित्सा परीक्षण जरूरी है।

