सलोनी तिवारी: मण्डलायुक्त सभागार, कानपुर मण्डल में आज बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन विषय पर एक मंडलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में निर्णय लिया गया कि कानपुर मण्डल के सभी जिले दिसम्बर 2026 तक बाल श्रम से पूर्णतः मुक्त होंगे।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी सुश्री दीक्षा जैन, अपर आयुक्त श्री बृज किशोर, और उप श्रमायुक्त श्री शमीम अख्तर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
अपर आयुक्त बृज किशोर ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 2027 तक पूरे प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाया जाना है, जबकि कानपुर मंडल में यह लक्ष्य एक वर्ष पूर्व, 2026 तक ही प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है।
कानपुर क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी श्री राम लखन पटेल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। श्रम विभाग के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम 2016 की मुख्य विशेषताएँ बताईं और कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वय से ही 2027 तक बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश का सपना साकार होगा।
कार्यशाला में बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। जिला अधिकारियों ने बाल श्रम की रोकथाम, बचाव, पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर समूह चर्चा कर डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान तैयार करने की रूपरेखा प्रस्तुत की।
महिला कल्याण विभाग के उपनिदेशक पुनीत मिश्रा ने बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप, विधवा पेंशन योजना जैसी योजनाओं की जानकारी दी।
कार्यशाला में भारतीय मजदूर संघ के अनिल उपाध्याय, बृजेश अवस्थी (अध्यक्ष, PIA) और FITA अध्यक्ष सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
उप श्रमायुक्त श्री शमीम अख्तर ने भारत की पोलियो उन्मूलन रणनीति को उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत करते हुए कहा कि उसी तरह की कन्वर्जेंट मॉडल रणनीति बाल श्रम उन्मूलन में भी अपनाई जा सकती है।
इस कार्यशाला में कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, औरेया, इटावा और फर्रुखाबाद जिलों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें शिक्षा, महिला कल्याण, पुलिस, श्रम, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, बाल संरक्षण इकाई (DCPU), एनजीओ, और मानव तस्करी विरोधी इकाई (AHTU) के सदस्य शामिल थे।

