सलोनी तिवारी:
लोक आस्था का महापर्व कार्तिक छठ पूजा 2025 आज यानी शनिवार से “नहाय-खाय” के साथ शुरू हो रहा है। यह चार दिवसीय व्रत 28 अक्तूबर (मंगलवार) को ऊषा अर्घ्य के साथ संपन्न होगा।
छठ पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सूर्य देव की उपासना, प्रकृति के प्रति आभार और मानव के आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण भी है।
यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है।
🌞 पहली बार छठ व्रत करने वालों के लिए जरूरी बातें
छठ पूजा में भगवान भास्कर (सूर्य देव) की पूजा की जाती है, जिन्हें प्रकृति के देवता कहा गया है।
इस पूजा में प्रकृति के पांच तत्व — जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी और आकाश — का विशेष महत्व होता है।
“अविवाहित महिला या पुरुष भी संकल्प लेकर इस पूजा में शामिल हो सकते हैं। यह ऐसा व्रत है जिसमें पहले फल मिलता है और फिर अनुष्ठान पूरा किया जाता है।”
छठ पूजा की चारों दिन की विधि और वैज्ञानिक महत्व
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पहला दिन – नहाय-खाय (शनिवार, 25 अक्टूबर)
व्रती (व्रत करने वाले) शुद्ध होकर नदी या तालाब से स्नान करते हैं और जल तत्व का सेवन करते हैं।
इस दिन लौकी, चना दाल और चावल का भोजन बनाकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है। -
दूसरा दिन – खरना (रविवार, 26 अक्टूबर)
सूर्यास्त के बाद गुड़ और चावल से बने प्रसाद (खीर) का सेवन किया जाता है।
यह अग्नि तत्व से जुड़ा हुआ दिन माना जाता है। -
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (सोमवार, 27 अक्टूबर)
इस दिन व्रती निर्जल उपवास रखते हैं और शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। -
चौथा दिन – उषा अर्घ्य (मंगलवार, 28 अक्टूबर)
भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत का समापन होता है।
यह वायु तत्व के साथ प्रकृति से एकत्व का प्रतीक है।
स्वच्छता और आस्था का पर्व
“छठ पूजा में आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य अनुसार पूजा सामग्री और वस्त्र खरीद सकते हैं। यदि कोई रोगी, वृद्ध या बालक है और औषधि ले रहा है, तो वह औषधि का सेवन कर सकता है — इससे व्रत पर कोई दोष नहीं लगता।”
इस व्रत में सबसे अधिक महत्व स्वच्छता, शुद्धता और श्रद्धा का होता है। कहा जाता है कि जहां स्वच्छता और मन की शुद्धता होती है, वहीं छठ मैया का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


