सलोनी तिवारी: कानपुर, 22 अक्टूबर 2025 — मैनावती मार्ग स्थित इस्कॉन कानपुर में बुधवार को श्री श्री गिरिराज महाराज जी की अलौकिक गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर भक्ति गीतों, कीर्तन और अन्नकूट महोत्सव की पवित्र ऊर्जा से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः कालीन मंगला आरती के साथ हुई, जिसमें श्री श्री राधा माधव जी, श्री श्री निताई गौर सुंदर, एवं श्री श्री जानकी वल्लभ लक्ष्मण हनुमान जी के दिव्य दर्शन हुए। भक्तगण पूर्ण श्रद्धा और समर्पण भाव से भगवान की सेवा में लीन रहे।
श्रीमद्भागवतम कथा सत्र में गोवर्धन लीला के तत्वों पर विशेष चर्चा की गई। कथा के माध्यम से यह बताया गया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देव के अभिमान को भंग करते हुए गिरिराज पर्वत को अपने श्रीहस्त से सात दिनों तक धारण किया और भक्तों की रक्षा की। यह लीला त्याग, समर्पण, और भक्ति भाव की पराकाष्ठा को दर्शाती है।
सुबह 11 बजे से वैष्णव भजन और कीर्तन का कार्यक्रम आरंभ हुआ। मृदंग, करताल और अन्य वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों के साथ जब हरे कृष्ण महामंत्र का गान हुआ तो वातावरण कृष्ण-भावनाभावित बन गया।
इस अवसर पर 1008 भोगों से श्री गिरिराज महाराज जी का भव्य स्वरूप सजाया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। 12 बजे से अन्नकूट महोत्सव का आरंभ हुआ, जिसमें भक्तों ने गिरिराज जी के दर्शन एवं परिक्रमा कर पुण्य प्राप्त किया। दोपहर 1 बजे विशेष महाप्रसाद वितरण किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने भाग लिया।
इस्कॉन कानपुर के भक्तों ने बताया कि गिरिराज महाराज हरिदासों में सर्वश्रेष्ठ हैं — जिन्होंने अपने शरीर को भगवान की लीलाभूमि के लिए समर्पित किया। भगवान ने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि गिरिराज जी प्रेम और भक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं।
गोवर्धन पूजा का यह आयोजन इस वर्ष कानपुर में सबसे भव्य और अनोखा रहा, जिसने भक्तों के हृदय में गहरी भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का संचार किया।

