दीवाली 2025: क्या आप सही गणेश-लक्ष्मी मूर्ति खरीद रहे हैं? ज़रा इन बातों पर ध्यान दें वरना पछताना पड़ सकता है!

सलोनी तिवारी: दीवाली का पर्व नजदीक है और हर घर में मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। धन और बुद्धि के संगम का प्रतीक यह पूजन तभी फलदायी होता है जब मूर्तियों के चयन में शास्त्रों और परंपराओं का ध्यान रखा जाए। आइए जानते हैं कि दीवाली 2025 पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. मूर्ति हर साल नई हो

दीवाली पूजन के लिए हर वर्ष नई गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां खरीदनी चाहिए। पुरानी मूर्तियों का विसर्जन कर दें। अगर आपके पास चांदी की मूर्तियां हैं, तो उन्हें गंगाजल से शुद्ध कर पुनः पूजा में प्रयोग कर सकते हैं।

2. गणेशजी की मूर्ति का चयन ऐसे करें

  • गणेशजी की सूंड़ बाईं ओर मुड़ी हुई मूर्ति गृहस्थ और व्यापारियों के लिए शुभ मानी जाती है।

  • भगवान गणेश के हाथ में मोदक अवश्य होना चाहिए। यह सुख और समृद्धि का प्रतीक है।

  • मूर्ति में गणेशजी के वाहन मूषक (चूहा) का होना अनिवार्य है।

  • लाल या सफेद रंग की गणेश प्रतिमा शुभ फल देती है।

3. लक्ष्मी माता की मूर्ति कैसी होनी चाहिए

  • मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजमान हों और उनका हाथ वरमुद्रा में हो, जिससे धन की वर्षा होती दिखे।

  • मां लक्ष्मी की खड़ी हुई प्रतिमा न लें — यह उनके जाने का संकेत माना जाता है।

  • मां लक्ष्मी की मूर्ति में उल्लू वाहन वाला स्वरूप न खरीदें, यह अशुभ माना जाता है।

4. अलग-अलग मूर्तियां लें

दीवाली पूजन के लिए लक्ष्मी और गणेशजी की अलग-अलग मूर्तियां खरीदें। एक साथ जुड़ी हुई प्रतिमाएं शास्त्रों के अनुसार शुभ नहीं मानी जातीं।

5. मूर्ति का पदार्थ और रंग

  • मिट्टी, पीतल, या चांदी से बनी मूर्तियां सबसे शुभ होती हैं।

  • धर्मशास्त्रों के अनुसार मिट्टी की मूर्ति की पूजा सर्वोत्तम मानी गई है, विशेषकर यदि वह गंगा, तालाब या गौशाला की मिट्टी से बनी हो।

6. दुकान और बजट का ध्यान रखें

मूर्तियां हमेशा प्रतिष्ठित और विश्वसनीय दुकान से खरीदें। बजट चाहे छोटा हो या बड़ा, मूर्ति की पवित्रता और निष्ठा सबसे जरूरी है।

7. स्थापना की दिशा और पूजन विधि

मूर्तियों की स्थापना उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में करें। पूजन के बाद मूर्तियों को सुरक्षित और सम्मानपूर्वक रखें, तथा अगले वर्ष पुराने प्रतिमाओं का विसर्जन गंगाजल या बहते जल में करें।

दीवाली के इस शुभ पर्व पर इन बातों का ध्यान रखकर आप न केवल धन की बल्कि सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वर्षा अपने जीवन में आमंत्रित कर सकते हैं।


डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अंशिका मीडिया किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं करता। किसी भी मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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