नई दिल्ली: भारत में इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्रों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली जेईई (JEE) और नीट (NEET) जैसी प्रवेश परीक्षाओं की अत्यधिक कठिनाई और तीव्र प्रतिस्पर्धा ने लाखों छात्रों को महंगी कोचिंग कक्षाओं पर निर्भर बना दिया है। कोचिंग पर बढ़ती इस निर्भरता ने छात्रों में मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव, और यहाँ तक कि आत्महत्या जैसे गंभीर मामले भी बढ़ा दिए हैं। कोचिंग संस्थानों की अव्यवस्था और ‘डमी स्कूल’ की बढ़ती संख्या भी छात्रों के संपूर्ण विकास को बाधित कर रही है।
ऐसे गंभीर हालात को देखते हुए, केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। अब केंद्र सरकार ने जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की कठिनाई के स्तर की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये प्रवेश परीक्षाएं कक्षा 12 के पाठ्यक्रम के अनुसार हों। सरकार का लक्ष्य है कि छात्र बिना कोचिंग के, सिर्फ स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करके भी इन परीक्षाओं को सफलतापूर्वक पास कर सकें।
क्या है सरकार का नया प्लान?
इस महत्वपूर्ण समीक्षा के लिए, सरकार ने जून 2025 में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
- समिति का काम: यह समिति जेईई और नीट जैसी प्रवेश परीक्षाओं के कठिनाई के स्तर की गहन जाँच करेगी और यह देखेगी कि क्या ये परीक्षाएं वास्तव में कक्षा 12 के सिलेबस के अनुरूप हैं या नहीं।
- समिति का नेतृत्व: इसका नेतृत्व उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी कर रहे हैं।
- सदस्य: समिति में देश के कई बड़े शिक्षा संस्थानों के विशेषज्ञ और स्कूल प्रतिनिधि शामिल हैं।
समीक्षा क्यों है जरूरी?
पिछले कुछ वर्षों में, इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता तेजी से बढ़ी है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर: कोचिंग का अत्यधिक बोझ और दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है, जिसके चलते कोटा जैसे कोचिंग हब से आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं।
- डमी स्कूल की समस्या: ‘डमी स्कूल’ यानी सिर्फ कोचिंग के लिए बनाए गए औपचारिक स्कूल, छात्रों को स्कूल के नियमित वातावरण और गतिविधियों से दूर करके उनके संपूर्ण विकास को रोक रहे हैं।
- नई शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य: सरकार का यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP) की मूल सोच से जुड़ा है। NEP का उद्देश्य शिक्षा को समझ-आधारित बनाना, रटने की प्रवृत्ति को खत्म करना और छात्रों को रचनात्मक एवं व्यावहारिक सोच के लिए प्रेरित करना है।
सरकार की यह पहल लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो प्रवेश परीक्षाओं की अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और कोचिंग के बढ़ते खर्च से जूझ रहे हैं। यदि परीक्षा का स्तर 12वीं के अनुरूप होता है, तो इससे शिक्षा प्रणाली में संतुलन आएगा और कोचिंग संस्कृति पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

