सलोनी तिवारी: दशहरे के दिन नीलकण्ठ पक्षी के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जिस व्यक्ति को इस दिन नीलकण्ठ दिख जाए, उसके जीवन से अशुभता दूर होकर सफलता और समृद्धि आती है।
रामायण से जुड़ी कथा कहा जाता है कि जब भगवान श्रीराम लंका विजय के लिए निकले थे, तब नीलकण्ठ पक्षी उनके सामने आया। इसे शुभ संकेत मानकर श्रीराम ने युद्ध में प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तभी से इस पक्षी को दशहरे पर विजय का द्योतक माना जाने लगा।
लोक आस्था और परंपरा देश के कई हिस्सों में दशहरे की सुबह नीलकण्ठ पक्षी को देखने की परंपरा निभाई जाती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सौभाग्य, उन्नति और शुभ फल का प्रतीक माना जाता है।
प्रकृति से जुड़ा संदेश नीलकण्ठ का नीला रंग आकाश और शांति का प्रतीक है। इसे भगवान शिव के नीलकण्ठ स्वरूप से भी जोड़ा जाता है। साथ ही, इसे शुभ मानने की परंपरा पर्यावरण और पक्षी संरक्षण का भी संदेश देती है।


