सलोनी तिवारी: हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पर्व पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। यही कारण है कि दशहरे के दिन रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है, जिसे अधर्म और अहंकार के अंत का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में दशहरे का नज़ारा कुछ अलग ही होता है। यहां एक ऐसा मंदिर है जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है।
कहां स्थित है रावण का मंदिर?
कानपुर के खास बाजार, शिवाला, पटकापुर इलाके में यह अनोखा रावण मंदिर स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण सन 1868 में महाराज गुरु प्रसाद ने करवाया था।
जहां पूरे देश में दशहरे के दिन रावण दहन होता है, वहीं इस मंदिर में सुबह रावण की विधिविधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
क्यों होती है रावण की पूजा?
इस मंदिर में रावण की पूजा करने के पीछे स्थानीय मान्यता है कि रावण केवल एक राक्षस राजा ही नहीं, बल्कि महान विद्वान, ज्योतिषाचार्य और असाधारण शक्तियों से संपन्न व्यक्ति था।
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रावण को ज्ञान और शक्ति का प्रतीक मानकर यहां पूजा की जाती है।
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माना जाता है कि अंतिम समय में स्वयं भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसके पास भेजा था।
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इसी कारण यहां दशहरे के दिन उसकी पूजा कर उसे स्मरण किया जाता है।
साल में सिर्फ एक दिन खुलता है यह मंदिर
रावण का यह अनोखा मंदिर पूरे साल बंद रहता है और केवल दशहरे के दिन ही पूजा-अर्चना के लिए खोला जाता है। इस दिन सुबह यहां विशेष विधियों से पूजा की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।


